Meaning of

ख़्वार

khwaar • خوار

अपमानित; लज्जित; नीचा दिखाया गया

humiliated; disgraced; abased

ذلیل; رسوا; پست

Persian

तिरे मिलने की ख़्वाहिश और हफ़्ता ख़्वार हो जाना
मुझे सब याद है वो पीर से इतवार हो जाना

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बे-सबब मरने से अच्छा है कि हो कोई सबब
दोस्तों सिगरेट पियो मय-ख़्वारियाँ करते रहो

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तू अपने सारे दुख जा कर बताता है जिन्हें, इक दिन
बढ़ाएँगे वही ग़म-ख़्वार तेरी आँख का पानी

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ग़म में हम सूरत-ए-गमख़ार नहीं पढ़ते हैं
इस लिए मीर के अश'आर नहीं पढ़ते हैं

मेरी आँखें तेरी तस्वीर से जा लगती हैं
सुब्ह उठकर सभी अख़बार नहीं पढ़ते हैं

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रहबर भी ये हमदम भी ये ग़म-ख़्वार हमारे
उस्ताद ये क़ौमों के हैं में'मार हमारे

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पहली मुलाक़ात की वो आवारगी ख़्वार करना
हाँ याद रखना झिझकते वो आँखों से प्यार करना

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मिले थे बिन बुलाए आज ज़ाहिर प्यार करने को
दिलासा क़त्ल से पहले दिया ग़म-ख़्वार करने को

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किसी की लाश खाती है किसी का ख़ून पीती है
बहुत खूॅंखार है दुनिया बहुत प्यासी ज़मीं है अब

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होश तू आने न देना फिर मुझे
देख साक़ी और दिखा मयख़्वारगी

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दुआ की है मिले वो प्यार दामन में
बहाएंँ अश्क जिस सरशार दामन में

न आओ पास के आँखें मिरी हैं नम
कि है कुछ दर्द इस गम-ख़्वार दामन में

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तिरे मिलने की ख़्वाहिश और हफ़्ता ख़्वार हो जाना
मुझे सब याद है वो पीर से इतवार हो जाना

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बे-सबब मरने से अच्छा है कि हो कोई सबब
दोस्तों सिगरेट पियो मय-ख़्वारियाँ करते रहो

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यह शब्द गहरे शर्म और अपमान की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर एक ऐसे पात्र की भावनात्मक उथल-पुथल को दर्शाता है जो अनुग्रह से गिर गया है या जिसने अपनी गरिमा खो दी है।

कवि 'ख़्वार' का उपयोग पतन और मुक्ति के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अक्सर पिछले गौरव के क्षणों के साथ विपरीत होता है, स्थिति और सम्मान की क्षणिक प्रकृति पर जोर देता है।

ख़्वार हमें गर्व की नाजुक प्रकृति की याद दिलाता है। यह मानव स्थिति पर एक मार्मिक प्रतिबिंब है।