Meaning of

ग़म-ए-जाँ

gham-e-jaan • رقصاں

जीवन का दुःख; अस्तित्व का शोक

sorrow of life; existential grief

زندگی کا غم; وجودی غم

Persian

इक ये भी तो अंदाज़-ए-इलाज-ए-ग़म-ए-जाँ है ऐ चारागरो दर्द बढ़ा क्यूँँ नहीं देते — Ahmad Faraz
शरीक-ए-ज़िंदगी अच्छी रहे अरमान ही होता ग़म-ए-जानाँ सिवा जीना कहाँ आसान ही होता — Manohar Shimpi
आँखें ग़ज़ाल हिरनी हैं ज़ुल्फ़ घटा सावन पर्वत पे रक़्साँ कोई बादल लगती हो — ALI ZUHRI
है वही कश्ती पुरानी है वही दरिया मेरा जिस पे तू आने न पाया है वही रस्ता मेरा मैं मिरी मसरूफ़ियत से तंग आ जाता हूँ दोस्त मुझ को सीने से लगा के वक़्त कर ज़ाया' मेरा अपनी वहशत का तक़ाज़ा ढूंढता हूँ दर-ब-दर ले गया है कोहकन जिस रोज़ से तेशा मेरा याद कर कूचा-नवर्दी,याद कर उल्फ़त के दिन याद कर बातें मेरी और याद कर चेहरा मेरा जब हवाएँ थक गईं थीं कोशिशें कर दश्त में रेत तब रक्साँ हुई थी चूम कर साया मेरा बारिशों को मौसमों का खेल सब कहते हैं पर रो पड़े थे अब्र-पारे जान कर क़िस्सा मेरा आँख वो हँसती रही तो खिल उठे सूखे गुलाब आँख वो रोने लगी तो रो पड़ा सहरा मेरा ख़ुसरवान-ए-शहर मैं हो जाऊँगा इक लम्स से और फ़क़त इक दीद से भर जाएगा कासा मेरा मैं किताबों के जहाँ का एक ख़ुशक़िस्मत किताब नाव बच्चों ने बनाया फाड़ कर सफ़्हा मेरा उस नज़र को ख़्वाहिशों का शौक़ दे मेरा ख़याल उस जबीं को रौशनी देता रहे बोसा मेरा मैं मुसलसल बंद करता हूँ मगर फिर दम-ब-दम याद उस की खोलती जाती है दरवाज़ा मेरा — Prasoon

यह वाक्यांश एक गहरी, व्यक्तिगत उदासी को दर्शाता है जो साधारण दुःख से परे है। यह अस्तित्व के बोझ, होने के भार और जीवन के साथ आने वाले अनिवार्य संघर्षों की बात करता है। कविता में, यह अक्सर सार्वभौमिक मानव स्थिति का प्रतीक होता है, जिसमें हानि, लालसा और अर्थ की खोज के विषय शामिल होते हैं।

'ग़म-ए-जाँ' का उपयोग कवि अक्सर मानवीय भावनाओं की गहराई का पता लगाने के लिए करते हैं। यह व्यक्तिगत हानि पर एक चिंतन या पीड़ा की प्रकृति पर एक व्यापक ध्यान हो सकता है। यह वाक्यांश खुशी या आशा के क्षणों के साथ विरोधाभास कर सकता है, जो मानव अनुभव की द्वैतता को उजागर करता है।

'ग़म-ए-जाँ' अपनी काव्यात्मक सार में उस गहन उदासी को पकड़ता है जो मानव आत्मा को परिभाषित करती है। यह हमारे अस्तित्व में गुंथे हुए सौंदर्य और पीड़ा की याद दिलाता है।