Meaning of

ग़म-ए-हस्ती

gham-e-hasti • غم ہستی

अस्तित्व का ग़म; होने का दुःख

sorrow of existence; grief of being

وجود کا غم; ہونے کا دکھ

Persian

मौत आई है नजात-ए-ग़म-ए-हस्ती देने जान दे दूँ तो मिरा हक़ भी अदा हो जाए — Dharmesh bashar
दिल-ए-नादाँ इसे तस्लीम कर ले ग़म-ए-हस्ती रफ़ीक़-ए-ज़िंदगी है — Shajar Abbas
ये काम ज़ाहिदों के मैं ख़िलाफ़ कर रहा हूँ सनम के घर का मुसलसल तवाफ़ कर रहा हूँ — Aamir Rahmati

'ग़म-ए-हस्ती' उस गहरे दुःख को पकड़ता है जो मानव स्थिति के साथ आता है। कविता में, यह अस्तित्व के भार को व्यक्त करने का एक माध्यम है, जीवन की छाया में रहने वाले अनिवार्य दुःख को। यह पीड़ा के सार्वभौमिक अनुभव और उसके भीतर पाई जाने वाली उदासीन सुंदरता की बात करता है।

कवि 'ग़म-ए-हस्ती' का उपयोग अस्तित्वगत निराशा और पीड़ा के बीच अर्थ की खोज के विषयों में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह अक्सर आनंद के क्षणों के विपरीत होता है, जीवन की द्वैतता को उजागर करता है। यह मानव संघर्ष की एक मार्मिक याद दिलाता है।

'ग़म-ए-हस्ती' में, कोई जीवन के अंतर्निहित दुःख की गूंज पाता है। यह छायाओं के बीच मानव आत्मा की दृढ़ता का प्रमाण है।