Meaning of

गुमाँ

gumaan • گماں

संदेह; शक; कल्पना

doubt; suspicion; imagination

شک; شبہ; تصور

Persian

वो मेहरबाँ है तो इक़रार क्यूँँ नहीं करता
वो बद-गुमाँ है तो सौ बार आज़माए मुझे

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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए
तुम मेरी जान किस गुमान में हो

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गुमान है या किसी विश्वास में है
सभी अच्छे दिनों की आस में है

ये कैसा जश्न है घर वापसी का
अभी तो राम ही वनवास में है

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बद-गुमानी को बढ़ा कर तुम ने ये क्या कर दिया
ख़ुद भी तन्हा हो गए मुझ को भी तन्हा कर दिया

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अब तलक उस को ध्यान हो मेरा
क्या पता ये गुमान हो मेरा

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ये भी इक रंग है शायद मिरी महरूमी का
कोई हँस दे तो मोहब्बत का गुमाँ होता है

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ये मेरी ज़िद ही ग़लत थी कि तुझ सेा बन जाऊँ
मैं अब न अपनी तरह हूँ न तेरे जैसा हूँ

हमारे बीच ज़माने की बद-गुमानी है
मैं ज़िंदगी से ज़रा कम ही बात करता हूँ

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जब बुलंदी का गुमाँ था तो नहीं याद आई
अपनी परवाज़ से टूटे तो ज़मीं याद आई

वही आँखें कि जो ईमान-शिकन आँखें हैं
उन्हीं आँखों की हमें दावत-ए-दीं याद आई

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आते आते राह पर वो आएँगे
जाते जाते बद-गुमानी जाएगी

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जो तुम हो तो ये कैसे मान लूँ मैं
कि जो कुछ है यहाँ बस इक गुमाँ है

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वो मेहरबाँ है तो इक़रार क्यूँँ नहीं करता
वो बद-गुमाँ है तो सौ बार आज़माए मुझे

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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए
तुम मेरी जान किस गुमान में हो

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गुमाँ अनिश्चितता और अटकलों की छायादार दुनिया को पकड़ता है। कविता में, यह अक्सर वास्तविकता और भ्रम के बीच नृत्य करता है, पाठक को मन की गहराइयों का पता लगाने के लिए आमंत्रित करता है।

कवि 'गुमाँ' का उपयोग संदेह और आत्मनिरीक्षण के विषयों में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह ज्ञात और अज्ञात के बीच एक पुल के रूप में कार्य करता है, अक्सर गहन रहस्योद्घाटन की ओर ले जाता है।

गुमाँ मन की भूलभुलैया के माध्यम से यात्रा का निमंत्रण देता है, जहाँ छायाएँ और प्रकाश आपस में मिलते हैं।