Meaning of

गौहर

gauhar • گوہر

रत्न; सार

jewel; essence

گوہر; جوہر

Persian

हो अकेले तो इस में ग़म क्या है
सीप में रहता है गुहर तन्हा

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शुमार अपना भी हो जाए अदब के नाम चीनों में
ख़ुदा कुछ शे'र कहला दे अगर मुश्किल ज़मीनों में

मैं फ़न्न-ए-शा'इरी पर इस लिए क़ुर्बान हूँ रहबर
नहीं मिलता ये गौहर बादशाहों के ख़ज़ीनों में

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अश्क को गौहर बना लो
दर्द को ज़ेवर बना लो

राह के पत्थर को 'असलम'
मील के पत्थर बना लो

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मैं दर्द की ज़मीं पे गुहर ढूँढ़ता रहा
वो आई और इश्क़ का इज़हार कर गई

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जो खो दिया है तू ने मुकर्रर नहीं है ये
दुख जितना समझा उतना तो कमतर नहीं है ये

मुमकिन नहीं दोबारा इसे पाना अब यहाँ
यारों मशीनों से बना गौहर नहीं है ये

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मैं बुरा हूँ ऐसा तो तुम कहते हो
मेरी अच्छाई मगर गौहर भी है

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है गुहर हाथों में उस के साँस लेकिन रुक गई
इक गुहर के वास्ते दूजी गुहर खोनी पड़ी

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चाँद गौहर गुलाब मुश्क ग़ज़ल
इन से अच्छा तुम्हारा नाम नहीं

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आज उन सेे वस्ल के आसार लगते हैं ख़ुदाया
जाँ इवज़ ये गौहर-ए-नायाब कर अपने हवाले

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हो अकेले तो इस में ग़म क्या है
सीप में रहता है गुहर तन्हा

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शुमार अपना भी हो जाए अदब के नाम चीनों में
ख़ुदा कुछ शे'र कहला दे अगर मुश्किल ज़मीनों में

मैं फ़न्न-ए-शा'इरी पर इस लिए क़ुर्बान हूँ रहबर
नहीं मिलता ये गौहर बादशाहों के ख़ज़ीनों में

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'गौहर' एक कीमती रत्न या किसी मूल्यवान चीज़ के सार को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर छिपी हुई सुंदरता या जटिल वास्तविकता के भीतर के मूल सत्य का प्रतीक होता है।

कवि 'गौहर' का उपयोग दिल के छिपे खजानों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह अप्रत्याशित स्थानों में सुंदरता की खोज या सरलता में सत्य की खोज के विचार को उत्पन्न कर सकता है।

कविता में 'गौहर' अस्तित्व के छिपे रत्नों को उजागर करने की यात्रा के लिए आमंत्रित करता है।