Meaning of

गौहर

gauhar • گوہر

रत्न; सार

jewel; essence

گوہر; جوہر

Persian

मैं दर्द की ज़मीं पे गुहर ढूँढ़ता रहा वो आई और इश्क़ का इज़हार कर गई — Nirmal Nadeem
मैं बुरा हूँ ऐसा तो तुम कहते हो मेरी अच्छाई मगर गौहर भी है — Meem Alif Shaz
चाँद गौहर गुलाब मुश्क ग़ज़ल इन से अच्छा तुम्हारा नाम नहीं — Meem Alif Shaz
हो अकेले तो इस में ग़म क्या है सीप में रहता है गुहर तन्हा — Himanshu Upadhyay Som
है गुहर हाथों में उस के साँस लेकिन रुक गई इक गुहर के वास्ते दूजी गुहर खोनी पड़ी — Maher painter 'Musavvir'
आज उन सेे वस्ल के आसार लगते हैं ख़ुदाया जाँ इवज़ ये गौहर-ए-नायाब कर अपने हवाले — Nikhil Tiwari 'Nazeel'

'गौहर' एक कीमती रत्न या किसी मूल्यवान चीज़ के सार को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर छिपी हुई सुंदरता या जटिल वास्तविकता के भीतर के मूल सत्य का प्रतीक होता है।

कवि 'गौहर' का उपयोग दिल के छिपे खजानों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह अप्रत्याशित स्थानों में सुंदरता की खोज या सरलता में सत्य की खोज के विचार को उत्पन्न कर सकता है।

कविता में 'गौहर' अस्तित्व के छिपे रत्नों को उजागर करने की यात्रा के लिए आमंत्रित करता है।