Meaning of

चराग़-ए-दिल

charaagh-e-dil • چراغ دل

दिल का दीपक; आंतरिक प्रकाश

lamp of the heart; inner light

دل کا چراغ; اندرونی روشنی

Persian

किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आश्ना नहीं
ऐसा मिला है दर्द-ए-दिल जिस की कोई दवा नहीं

अपना बना के ऐ सनम तुम ने जो आँख फेर ली
ऐसा बुझा चराग़-ए-दिल फिर ये कभी जला नहीं

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चराग़ दिल का मुक़ाबिल हवा के रखते हैं
हर एक हाल में तेवर बला के रखते हैं

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नज़र से तुम को मिले न कोई सुराग़ दिल का
झुका के गर्दन बुझा लिया है चराग़ दिल का

सुनूँ न कैसे करूँँ न क्यूँँकर मैं अपने दिल की
मेरे अलावा है कौन इस बद-दिमाग़ दिल का

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किस को सुनाऊँ हाल-ए-ग़म कोई ग़म-आश्ना नहीं
ऐसा मिला है दर्द-ए-दिल जिस की कोई दवा नहीं

अपना बना के ऐ सनम तुम ने जो आँख फेर ली
ऐसा बुझा चराग़-ए-दिल फिर ये कभी जला नहीं

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चराग़ दिल का मुक़ाबिल हवा के रखते हैं
हर एक हाल में तेवर बला के रखते हैं

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चराग़-ए-दिल उस आंतरिक प्रकाश का प्रतीक है जो आत्मा का मार्गदर्शन करता है। कविता में, यह अक्सर आशा, ज्ञान और उस स्थायी आत्मा का प्रतिनिधित्व करता है जो भीतर के अंधकार को रोशन करती है।

कवि चराग़-ए-दिल का उपयोग प्रबोधन, दृढ़ता और प्रतिकूलता के बीच चमकने की दिल की क्षमता की थीम को उजागर करने के लिए करते हैं।

चराग़-ए-दिल आशा का एक प्रकाशस्तंभ है, दिल की स्थायी रोशनी का प्रमाण है।