Meaning of

चश्म

chashm • چشم

आँख; दृष्टि; नज़र

eye; vision; sight

آنکھ; نظر; بصارت

Persian

आप की याद आती रही रात भर चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर — Makhdoom Mohiuddin
बोसा लिया जो उस लब-ए-शीरीं का मर गए दी जान हम ने चश्मा-ए-आब-ए-हयात पर — Ameer Minai
है आज ये गिला कि अकेला है 'शहरयार' तरसोगे कल हुजूम में तन्हाई के लिए — Shahryar
चश्म हो तो आईना-ख़ाना है दहर मुँह नज़र आता है दीवारों के बीच — Meer Taqi Meer
बाजी बदी थी उस ने मेरे चश्म-ए-तर के साथ आख़िर को हार हार के बरसात रह गई — Khwaja Meer Dard
देखो तो चश्म-ए-यार की जादू-निगाहियाँ बेहोश इक नज़र में हुई अंजुमन तमाम — Hasrat Mohani
किन नींदों अब तू सोती है ऐ चश्म-ए-गिर्या-नाक मिज़्गाँ तो खोल शहर को सैलाब ले गया — Meer Taqi Meer
न थी हाल की जब हमें अपने ख़बर रहे देखते औरों के ऐब-ओ-हुनर पड़ी अपनी बुराइयों पर जो नज़र तो निगाह में कोई बुरा न रहा — Bahadur Shah Zafar

'चश्म' शब्द देखने की नाज़ुक और गहरी प्रकृति को उजागर करता है। मूल रूप से यह केवल आँख का उल्लेख करता है, लेकिन कविता ने इसे दृष्टि और अंतर्दृष्टि की परतों से भर दिया है। आँख आत्मा की खिड़की बन जाती है, भावनाओं और अनकहे विचारों को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण।

कवि अक्सर 'चश्म' का उपयोग लालसा या प्रशंसा व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेमी की दृष्टि का प्रतीक हो सकता है, जो अनकहे वादों से भरी होती है। यह शब्द अंधत्व के साथ भी विपरीत हो सकता है, जो सच्ची दृष्टि के मूल्य को उजागर करता है।

कविता में, 'चश्म' केवल एक आँख नहीं रह जाती; यह भावना का पात्र और गहरी समझ का प्रतीक बन जाती है।