Meaning of

चश्म

chashm • چشم

आँख; दृष्टि; नज़र

eye; vision; sight

آنکھ; نظر; بصارت

Persian

मुँह ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द ओ लब-ए-ख़ुश्क ओ चश्म-ए-तर
सच्ची जो दिल-लगी है तो क्या क्या गवाह है

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पास मैं जिस के हूँ वो फिर भी, अच्छा लड़का ढूँढ़ रही है
उस ने लगा रक्खा है चश्मा, और वो चश्मा ढूँढ़ रही है

फ़ोन किया मैं ने और पूछा, अब तक घर से क्यूँँ नहीं निकली
उस ने कहा मुझ सेे मिलने का, एक बहाना ढूँढ़ रही है

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बग़ैर चश्में के जो देख भी न पाता है
वो बेवक़ूफ़ मुझे देखना सिखाता है

अगर ये वक़्त डुबोएगा मेरी नाव को
तो इस सेे कह दो मुझे तैरना भी आता है

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आप की याद आती रही रात भर
चश्म-ए-नम मुस्कुराती रही रात भर

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बाजी बदी थी उस ने मेरे चश्म-ए-तर के साथ
आख़िर को हार हार के बरसात रह गई

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बोसा लिया जो उस लब-ए-शीरीं का मर गए
दी जान हम ने चश्मा-ए-आब-ए-हयात पर

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देखो तो चश्म-ए-यार की जादू-निगाहियाँ
बेहोश इक नज़र में हुई अंजुमन तमाम

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किन नींदों अब तू सोती है ऐ चश्म-ए-गिर्या-नाक
मिज़्गाँ तो खोल शहर को सैलाब ले गया

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है आज ये गिला कि अकेला है 'शहरयार'
तरसोगे कल हुजूम में तन्हाई के लिए

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न थी हाल की जब हमें अपने ख़बर रहे देखते औरों के ऐब-ओ-हुनर
पड़ी अपनी बुराइयों पर जो नज़र तो निगाह में कोई बुरा न रहा

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मुँह ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द ओ लब-ए-ख़ुश्क ओ चश्म-ए-तर
सच्ची जो दिल-लगी है तो क्या क्या गवाह है

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पास मैं जिस के हूँ वो फिर भी, अच्छा लड़का ढूँढ़ रही है
उस ने लगा रक्खा है चश्मा, और वो चश्मा ढूँढ़ रही है

फ़ोन किया मैं ने और पूछा, अब तक घर से क्यूँँ नहीं निकली
उस ने कहा मुझ सेे मिलने का, एक बहाना ढूँढ़ रही है

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'चश्म' शब्द देखने की नाज़ुक और गहरी प्रकृति को उजागर करता है। मूल रूप से यह केवल आँख का उल्लेख करता है, लेकिन कविता ने इसे दृष्टि और अंतर्दृष्टि की परतों से भर दिया है। आँख आत्मा की खिड़की बन जाती है, भावनाओं और अनकहे विचारों को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण।

कवि अक्सर 'चश्म' का उपयोग लालसा या प्रशंसा व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेमी की दृष्टि का प्रतीक हो सकता है, जो अनकहे वादों से भरी होती है। यह शब्द अंधत्व के साथ भी विपरीत हो सकता है, जो सच्ची दृष्टि के मूल्य को उजागर करता है।

कविता में, 'चश्म' केवल एक आँख नहीं रह जाती; यह भावना का पात्र और गहरी समझ का प्रतीक बन जाती है।