बग़ैर चश्में के जो देख भी न पाता हैवो बेवक़ूफ़ मुझे देखना सिखाता हैअगर ये वक़्त डुबोएगा मेरी नाव कोतो इस से कह दो मुझे तैरना भी आता है— Vikram Gaur Vairagi