Meaning of

छांव

chaanv • چھاؤں

छाया; परछाई; सुरक्षा

shade; shadow; protection

سایہ; پرچھائیں; حفاظت

Sanskrit

वो पेड़ जिस की छाँव में कटी थी उम्र गाँव में
मैं चूम चूम थक गया मगर ये दिल भरा नहीं

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यूँँ नहीं है कि फ़क़त मैं ही उसे चाहता हूँ
जो भी उस पेड़ की छाँव में गया बैठ गया

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वो जिस की छाँव में पच्चीस साल गुज़रे हैं
वो पेड़ मुझ से कोई बात क्यूँँ नहीं करता

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इसी से जान गया मैं कि बख़्त ढलने लगे
मैं थक के छाँव में बैठा तो पेड़ चलने लगे

मैं दे रहा था सहारे तो इक हुजूम में था
जो गिर पड़ा तो सभी रास्ता बदलने लगे

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मेरे आँगन में एक बूढ़ा पेड़
छाँव भी देता है, दुआएँ भी

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धूप भी आराम करती थी जहाँ
अपना ऐसी छाँव से नाता रहा

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मुझ को छाँव में रखा और ख़ुद भी वो जलता रहा
मैं ने देखा इक फ़रिश्ता बाप की परछाईं में

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मुझे भी बख़्श दे लहजे की ख़ुश-बयानी सब
तेरे असर में हैं अल्फ़ाज़ सब, मआ'नी सब

मेरे बदन को खिलाती है फूल की मानिंद
कि उस निगाह में है धूप, छाँव, पानी सब

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ग़ुर्बत की ठंडी छाँव में याद आई उस की धूप
क़द्र-ए-वतन हुई हमें तर्क-ए-वतन के बा'द

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बन गया है शहर तो अब गाँव इनको चाहिए
काट देते हैं शजर फिर छाँव इनको चाहिए

आँख में इज़्ज़त नहीं है लड़कियों के वास्ते
और पायल के लिए फिर पाँव इनको चाहिए

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वो पेड़ जिस की छाँव में कटी थी उम्र गाँव में
मैं चूम चूम थक गया मगर ये दिल भरा नहीं

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यूँँ नहीं है कि फ़क़त मैं ही उसे चाहता हूँ
जो भी उस पेड़ की छाँव में गया बैठ गया

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मूल रूप से 'छांव' का अर्थ है किसी वृक्ष या संरचना द्वारा प्रदान की गई सुखद छाया, जो सूर्य की कठोरता से राहत देती है। कविता में, यह शब्द सुरक्षा और शांति की भावना को जागृत करता है, जीवन के बोझ से एक कोमल शरण।

'छांव' का उपयोग कवि अक्सर अराजकता के बीच शांति के आश्रय के रूप में करते हैं। यह वास्तविकता की कठोरता के विपरीत एक रूपकात्मक आश्रय प्रदान करता है। यह किसी प्रियजन के सुरक्षात्मक आलिंगन का भी प्रतिनिधित्व कर सकता है।

'छांव' की कोमल गोद में, व्यक्ति को सांत्वना और दुनिया की निरंतर गति से क्षणिक मुक्ति मिलती है।