Meaning of

ज़ख़्मी

zakhmi • زخمی

घायल; आहत; चोटिल

wounded; injured; hurt

زخمی; مجروح; دکھایا ہوا

Arabic

आँसू जो उन के आँखों से निकल जाते हैं
पत्थर दिल भी पल भर में ही पिघल जाते हैं

ज़ख़्मी होने से मैं दिल को बचाऊँ कैसे
वो मुस्काते हैं तो ख़ंजर चल जाते हैं

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हाथ काँटों से कर लिए ज़ख़्मी
फूल बालों में इक सजाने को

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शाख़-दर-शाख़ होती है ज़ख़्मी
जब परिंदा शिकार होता है

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रा'नाइयाँ समेट के सारे जहान की
जब कुछ न बन सका तेरी आँखें बनाईं तब

मैं इश्क़ हूँ रुका न किसी भी क़फ़स में तो
मज़बूतियों भरी ये सलाख़ें बनाईं तब

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शोर अंदर मेरे बढ़ता जा रहा है
चेहरे पे उस का ही ग़म अब छा रहा है

क्या कहा ज़ख़्मी हो तुम तो वार से फिर
फिर तुम्हें वो बे-वफ़ा क्यूँ भा रहा है

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सब को हैरत रही उन के दीदार से
हम को ज़ख़्मी किया अपने किरदार से


हाल पूछो तो है ख़ैरियत सब यहाँ

हैं मगर याद में उन के बीमार से

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दुआ अम्मी की है मेरी ये ग़ुर्बत भूल जाओगे
ख़ुदा इतना नवाज़ेगा मुसीबत भूल जाओगे

तड़पता दिल सुलगती जाँ जिगर ज़ख़्मी उगलता ख़ूँ
अगर जो देख लोगे तुम मोहब्बत भूल जाओगे

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तेरी नज़र से कोई रोज़ जख्मी होता है
ख़याल रखना किसी दिन वो मारा न जाएँ

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कि करते कुछ नहीं ज़ख़्मी हुए बैठे हैं
कि कैसे दिल तेरी ख़्वाहिश लिए बैठे हैं

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सोचता हूँ ज़ख़्मी दिल को देख कर
ज़ख़्म में दिल है या दिल पर ज़ख़्म है

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आँसू जो उन के आँखों से निकल जाते हैं
पत्थर दिल भी पल भर में ही पिघल जाते हैं

ज़ख़्मी होने से मैं दिल को बचाऊँ कैसे
वो मुस्काते हैं तो ख़ंजर चल जाते हैं

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हाथ काँटों से कर लिए ज़ख़्मी
फूल बालों में इक सजाने को

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'ज़ख़्मी' शब्द शारीरिक या भावनात्मक दर्द की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर प्रेम या जीवन की परीक्षाओं से छोड़े गए घावों का प्रतीक होता है, जो सहानुभूति और पीड़ा के साझा मानव अनुभव को जागृत करता है।

कवि अक्सर 'ज़ख़्मी' का उपयोग दिल टूटने और सहनशीलता के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह प्रेमी की पीड़ा या पीड़ितों की स्थायी भावना का वर्णन कर सकता है।

'ज़ख़्मी' अपनी काव्यात्मक गहराई में असुरक्षा और उपचार के सार्वभौमिक सत्य के साथ प्रतिध्वनित होता है। यह मानव आत्मा की सहनशीलता को संबोधित करता है।