Meaning of

ज़ख्म-ए-जिगर

zakham-e-jigar • زخم جگر

जिगर का घाव; गहरी भावनात्मक पीड़ा

wound of the liver; deep emotional pain

جگر کا زخم; گہرا جذباتی درد

Persian

तुम्हारी याद से ग़ाफ़िल नहीं रहूँगा कभी हमेशा ज़ख़्म-ए-जिगर को हरा रखूँगा मैं — Shajar Abbas
भरते कहाँ हैं ज़ख्म-ए-जिगर सर्द में कभी रह रह के दिल का दर्द उभरता है आज भी — Yasir Mustafvi
इश्क़ के मक़्तल चलो ज़ख़्म-ए-जिगर को देखते हैं लोग बाज़ीगर के कैसे अब हुनर को देखते हैं — Manohar Shimpi
शब-ए-फ़िराक़ में ज़ख़्म-ए-जिगर से रिसता है ख़ूँ रफ़ू इन्हें भला ख़य्यात क्यूँ नहीं करता — Shajar Abbas

मूल रूप में, 'ज़ख्म-ए-जिगर' का अर्थ है जिगर का शारीरिक घाव, जो गहरी आंतरिक पीड़ा का प्रतीक है। कविता में, यह गहरी भावनात्मक पीड़ा की छवि को उभारता है, जो अक्सर एकतरफा प्रेम या तड़प से जुड़ी होती है।

'ज़ख्म-ए-जिगर' का उपयोग कवि अपनी भावनात्मक घावों की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर प्रेम, हानि, और हृदय की मौन पीड़ा के बारे में छंदों में दिखाई देता है।

यह वाक्यांश हृदय के मौन, अदृश्य घावों को पकड़ता है। यह गहरी, आंतरिक पीड़ा के सार्वभौमिक मानव अनुभव को व्यक्त करता है।