Meaning of

ज़बूर

zuboor • مصحف

भजन; पवित्र गीत

psalms; sacred songs

زبور; مقدس گیت

Arabic

हम रोते तो बाबूजी भी रो देते हँसते रहना आँखों की मज़बूरी थी — Atul K Rai
ये मज़बूरी वो मज़बूरी ये लाचारी वो लाचारी ये सब मत गिनवाओ मुझ को जानाँ बे-वफ़ा हो मानो तुम — A R Sahil "Aleeg"

'ज़बूर' मूल रूप से भजनों का संग्रह है, जो पवित्र गीतों का समूह है। कविता में, यह दिव्य प्रेरणा और आध्यात्मिक चिंतन का भाव उत्पन्न करता है, जो अक्सर ईश्वर के साथ गहरे संबंध का प्रतीक होता है।

'ज़बूर' का उपयोग कवि आध्यात्मिकता और दिव्य संबंध के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह कवि की अपनी अर्थ की खोज या पवित्र पर चिंतन का प्रतीक हो सकता है। अक्सर सांसारिक चिंताओं के विपरीत, यह कविता को एक आध्यात्मिक स्तर पर ले जाता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ज़बूर' दिव्यता की ओर एक पुल के रूप में कार्य करता है, जो चिंतन और आध्यात्मिक गहराई का आश्रय प्रदान करता है।