Meaning of

ज़ार

zaar • زار

विलाप; रोना; शोक करना

lament; weep; mourn

نوحہ; رونا; ماتم کرنا

Persian

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख — Allama Iqbal
हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे — Abbas Tabish
जो गुज़ारी न जा सकी हम से हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है — Jaun Elia
मोहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं है इबादत से गुज़ारा कर रहे है — Fahmi Badayuni
हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा — Allama Iqbal

'ज़ार' शब्द गहरे दुःख और विलाप की भावना को व्यक्त करता है। अपने मूल अर्थ में, यह रोने या शोक करने की क्रिया को दर्शाता है, जो अक्सर गहरे और दिल से महसूस किए गए तरीके से होता है। कविता ने इस शब्द को अपनाया है ताकि मानव दुःख की गहराइयों का अन्वेषण किया जा सके, जिससे यह हानि और लालसा के सार्वभौमिक अनुभव के साथ गूंज सके।

कवि अक्सर 'ज़ार' का उपयोग भावनात्मक दर्द की तीव्रता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो साधारण दुःख की अभिव्यक्ति को आत्मा के कष्ट के गहन अन्वेषण में बदल सकता है। 'ज़ार' और आनंद के शब्दों के बीच का विरोधाभास मानव भावनाओं के स्पेक्ट्रम को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ज़ार' हृदय के गहरे दुःखों का एक माध्यम बन जाता है। यह हमें भेद्यता में पाई जाने वाली सुंदरता की याद दिलाता है।