Meaning of

ज़ार

zaar • زار

विलाप; रोना; शोक करना

lament; weep; mourn

نوحہ; رونا; ماتم کرنا

Persian

कोरे काग़ज़ पर रो रहे हो तुम
मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम

क्या कहा मुझ सेे दूर जाना है
इस का मतलब है जा चुके हो तुम

114

Download Image

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख

297

Download Image

मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है
जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है

मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है
वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है

214

Download Image

हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा

207

Download Image

ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे
अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे

मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी
उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे

206

Download Image

हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे
कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे

183

Download Image

कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है
फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है

तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती
तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है

166

Download Image

जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है

136

Download Image

मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था
तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे

ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया
मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे

129

Download Image

मोहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं है
इबादत से गुज़ारा कर रहे है

115

Download Image

कोरे काग़ज़ पर रो रहे हो तुम
मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम

क्या कहा मुझ सेे दूर जाना है
इस का मतलब है जा चुके हो तुम

114

Download Image

माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख

297

Download Image

'ज़ार' शब्द गहरे दुःख और विलाप की भावना को व्यक्त करता है। अपने मूल अर्थ में, यह रोने या शोक करने की क्रिया को दर्शाता है, जो अक्सर गहरे और दिल से महसूस किए गए तरीके से होता है। कविता ने इस शब्द को अपनाया है ताकि मानव दुःख की गहराइयों का अन्वेषण किया जा सके, जिससे यह हानि और लालसा के सार्वभौमिक अनुभव के साथ गूंज सके।

कवि अक्सर 'ज़ार' का उपयोग भावनात्मक दर्द की तीव्रता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो साधारण दुःख की अभिव्यक्ति को आत्मा के कष्ट के गहन अन्वेषण में बदल सकता है। 'ज़ार' और आनंद के शब्दों के बीच का विरोधाभास मानव भावनाओं के स्पेक्ट्रम को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ज़ार' हृदय के गहरे दुःखों का एक माध्यम बन जाता है। यह हमें भेद्यता में पाई जाने वाली सुंदरता की याद दिलाता है।