Meaning of

ज़िक्र-ए-ख़ाकसार

zikr-e-khaaksaar • ذکر خاکسار

विनम्रता का उल्लेख; विनम्रता पर चर्चा

mention of the humble; discourse on humility

ذکر خاکسار; عاجزی پر گفتگو

Persian

करे हो ज़िक्र-ए-सुख़न ज़िक्र-ए-ख़ाकसार बग़ैर ये कैसा ज़ौक़-ए-सुख़न है ये कैसी महफ़िल है — Ramnath Shodharthi

'ज़िक्र-ए-ख़ाकसार' वाक्यांश विनम्रता या विनम्र लोगों की चर्चा के विचार को व्यक्त करता है। यह विनम्रता और जमीन से जुड़े रहने के गुण को उभारता है, अक्सर सादगी की सुंदरता और कोमलता में शक्ति को उजागर करने के लिए प्रयोग किया जाता है।

कवि 'ज़िक्र-ए-ख़ाकसार' का उपयोग विनम्रता और सादगी के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह विनम्र होने में पाई जाने वाली शक्ति और विनम्रता में अनुग्रह की याद दिला सकता है। यह शब्द अक्सर अहंकार और गर्व के विपरीत होता है।

कविता में, 'ज़िक्र-ए-ख़ाकसार' विनम्रता में शक्ति की एक कोमल याद दिलाता है। यह हमें अनजान में सुंदरता और मृदुभाषी में शक्ति खोजने के लिए आमंत्रित करता है।