Meaning of

ज़ेहन-ए-वीरांँ

zehn-e-veeraan • ذہن ویران

उजड़ा हुआ मन; बंजर विचार

desolate mind; barren thoughts

ویران ذہن; بنجر خیالات

Persian

तेरी अंँगड़ाई के आलम का ख़याल आया जब ज़ेहन-ए-वीरांँ में खनकने लगे कंगन कितने — Shashank Shekhar Pathak

ज़ेहन-ए-वीरांँ एक ऐसे मन की छवि को उभारता है जो जीवन और आशा से रहित है, एक बंजर परिदृश्य जहाँ कभी रचनात्मकता और आनंद फला-फूला था। कविता में, यह हानि या मोहभंग के बाद की भावनात्मक वीरानी का प्रतीक है।

कवि ज़ेहन-ए-वीरांँ का उपयोग उन सपनों के टूटने के बाद की खालीपन को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह एक ऐसे दिल की चुप्पी को दर्शा सकता है जिसने आशा करना बंद कर दिया है या अधूरी इच्छाओं द्वारा छोड़ी गई शून्यता को।

ज़ेहन-ए-वीरांँ जीवन के तूफानों के सामने मन की नाजुकता की मार्मिक याद दिलाता है।