Meaning of

ज़ौक़-ए-नज़र

zauq-e-nazar • ذوق نظر

दृष्टि का स्वाद; सौंदर्य की सराहना

taste of sight; appreciation of beauty

نظر کا ذوق; حسن کی قدردانی

Arabic

इश्क़ का ज़ौक़-ए-नज़ारा मुफ़्त में बदनाम है हुस्न ख़ुद बे-ताब है जल्वा दिखाने के लिए — Asrar Ul Haq Majaz
यूँँ तो रहते हैं ख़ुद से बे-ख़बर भी है अपने पास पर ज़ौक़-ए-नज़र भी — Hrishita Singh
हसीन इतनी है तू ज़ौक़-ए-नज़र तो बन गया हूँ मैं मगर दिल की कियारी में नया कुछ बो नहीं सकता — Amaan Pathan

ज़ौक़-ए-नज़र एक परिष्कृत दृष्टि का भाव उत्पन्न करता है, जहाँ आँखें केवल निष्क्रिय दर्शक नहीं होतीं, बल्कि सौंदर्य की सराहना में सक्रिय भागीदार होती हैं। कविता में, यह अवधारणा एक गहरी, लगभग आध्यात्मिक संबंध का सुझाव देती है।

कवि अक्सर 'ज़ौक़-ए-नज़र' का उपयोग किसी पात्र या कथावाचक की सौंदर्य के प्रति गहरी सराहना को व्यक्त करने के लिए करते हैं। इसका उपयोग उन लोगों के बीच के अंतर को उजागर करने के लिए किया जा सकता है जो सतही रूप से देखते हैं और जो गहराई से अनुभव करते हैं। यह अक्सर प्रेम, प्रकृति और कला के विषयों की खोज करने वाले छंदों में प्रकट होता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ज़ौक़-ए-नज़र' हमें सतह से परे देखने के लिए आमंत्रित करता है, हमारे चारों ओर की दुनिया के साथ गहरे जुड़ाव का आग्रह करता है।