Meaning of

ज़ौक़-ए-सुख़न

zauq-e-sukhan • ذوق سخن

काव्य का स्वाद; काव्यात्मक संवेदनशीलता

taste for poetry; poetic sensibility

ذوق شاعری; شاعرانہ حساسیت

Arabic

करे हो ज़िक्र-ए-सुख़न ज़िक्र-ए-ख़ाकसार बग़ैर ये कैसा ज़ौक़-ए-सुख़न है ये कैसी महफ़िल है — Ramnath Shodharthi

ज़ौक़-ए-सुख़न कविता के प्रति परिष्कृत प्रशंसा और संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह काव्यात्मक अभिव्यक्तियों के भीतर सूक्ष्म भावनाओं और गहराइयों को समझने की क्षमता है, एक परिष्कृत स्वाद जो कला के अनुभव को समृद्ध करता है।

कवि अक्सर 'ज़ौक़-ए-सुख़न' का उपयोग किसी पात्र या कथावाचक की कविता के साथ गहरी जुड़ाव को उजागर करने के लिए करते हैं। यह कला रूप के साथ गहन जुड़ाव का सुझाव देता है, जो अक्सर आत्मनिरीक्षण और रहस्योद्घाटन के क्षणों की ओर ले जाता है।

ज़ौक़-ए-सुख़न काव्यात्मक आत्मा का उत्सव है, शब्दों के स्थायी आकर्षण और आत्मा को रूपांतरित करने की उनकी शक्ति का प्रमाण।