Meaning of

जिक्र

zikr • ذکر

उल्लेख; स्मरण

mention; remembrance

ذکر; یاد

Arabic

तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं — Mirza Ghalib
अब तेरे ज़िक्र पे हम बात बदल देते हैं कितनी रग़बत थी तेरे नाम से पहले पहले — Ahmad Faraz
यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे — Jaun Elia
तू तो फिर अपनी जान है तेरा तो ज़िक्र क्या हम तेरे दोस्तों के भी नख़रे उठाएँगे — Ali Zaryoun
ज़िक्र तुम्हारा बहुत ज़रूरी इन ग़ज़लों में जानेमन चाय बिना अदरक को डाले अच्छी थोड़ी बनती है — Tanoj Dadhich
वफ़ा नज़र नहीं आती कहीं ज़माने में वफ़ा का ज़िक्र किताबों में देख लेते हैं — Hafeez Banarasi

'जिक्र' का मूल अर्थ किसी बात या व्यक्ति का उल्लेख या स्मरण करना है। कविता में, यह अक्सर पुरानी यादों या तड़प का भाव उत्पन्न करता है, जहाँ कवि स्मृतियों में खो जाते हैं और किसी चीज़ को विचारों में जीवित रखने का प्रयास करते हैं।

कवि 'जिक्र' का उपयोग खोए हुए प्रेम या प्रिय क्षणों की याद दिलाने के लिए करते हैं। यह शब्दों के माध्यम से किसी की उपस्थिति को जीवित रखने के कार्य को भी दर्शा सकता है।

'जिक्र' स्मृति और उपस्थिति का भार वहन करता है, जो कभी था उसका एक कोमल स्मरण है।