Meaning of

तअ़ल्लुक़

ta'alluq • تعلق

संबंध; जुड़ाव; बंधन

relationship; connection; bond

تعلق; رشتہ; بندھن

Arabic

तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है

19

Download Image

भरे हुए जाम पर सुराही का सर झुका तो बुरा लगेगा
जिसे तेरी आरज़ू नहीं तू उसे मिला तो बुरा लगेगा

ये आख़िरी कंपकंपाता जुमला कि इस तअ'ल्लुक़ को ख़त्म कर दो
बड़े जतन से कहा है उस ने नहीं किया तो बुरा लगेगा

61

Download Image

हम हैं सूखे हुए तालाब पे बैठे हुए हंस
जो तअ'ल्लुक़ को निभाते हुए मर जाते हैं

48

Download Image

इसीलिए तो किसी को बताने वाला नहीं
कि तेरा मेरा तअल्लुक़ ज़माने वाला नहीं

पलट के आ ही गए हो तो इतना ध्यान रहे
तुम्हारा दोस्त हूँ लेकिन पुराने वाला नहीं

39

Download Image

बस एक रस्म-ए-तअल्लुक़ निभाने बैठे हैं
वगरना दोनों के कप में ज़रा भी चाय नहीं

38

Download Image

न जाने ख़त्म हुई कब हमारी आज़ादी
तअल्लुक़ात की पाबंदियाँ निभाते हुए

34

Download Image

हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसे
वो यार बा-वफ़ा न सही बे-वफ़ा तो है

27

Download Image

'फ़राज़' तर्क-ए-त'अल्लुक़ तो ख़ैर क्या होगा
यही बहुत है कि कम कम मिला करो उस से

26

Download Image

'मीर' से बैअत की है तो 'इंशा' मीर की बैअत भी है ज़रूर
शाम को रो रो सुब्ह करो अब सुब्ह को रो रो शाम करो

20

Download Image

जुर्म की तरह मोहब्बत को छुपा रक्खा है
हम गुनहगार नहीं हैं ये बताएँ किस को

रूठ जाते तो मनाना कोई दुश्वार न था
वो तअ'ल्लुक़ ही न रक्खें तो मनाएँ किस को

19

Download Image

तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है

19

Download Image

भरे हुए जाम पर सुराही का सर झुका तो बुरा लगेगा
जिसे तेरी आरज़ू नहीं तू उसे मिला तो बुरा लगेगा

ये आख़िरी कंपकंपाता जुमला कि इस तअ'ल्लुक़ को ख़त्म कर दो
बड़े जतन से कहा है उस ने नहीं किया तो बुरा लगेगा

61

Download Image

'तअ़ल्लुक़' एक ऐसा संबंध दर्शाता है जो व्यक्तियों को जोड़ता है, चाहे वह प्रेम, मित्रता या साझा अनुभवों के माध्यम से हो। कविता में, यह मानव भावनाओं के जटिल जाल और हमें जोड़ने वाले अदृश्य धागों की खोज करता है।

कवि 'तअ़ल्लुक़' का उपयोग मानव संबंधों की गहराई में जाने के लिए करते हैं। यह अक्सर अलगाव के विपरीत, एकता और साझा अस्तित्व पर जोर देता है।

कविता में, 'तअ़ल्लुक़' जीवन के ताने-बाने में हमें बांधने वाले गहरे संबंधों को प्रकट करता है।