Meaning of

तक़्सीम

taqseem • تقسیم

विभाजन; वितरण; बँटवारा

division; distribution; partition

تقسیم; بٹوارہ; تقسیم کاری

Arabic

कह दो अगर तक्सीम सरमाया हो मेरे इश्क़ का सब छोड़ो बस स्पर्श हाथों का अदा कर दोगी ना — Shubh Mathur
रोटियाँ तक़्सीम करने की क़सम खाते हैं जो ज़हर वो ही घोलते हैं मुल्क के आहार में — Deva morya 'Raahi'
कल रात में माज़ी मिरा फिर ख़्वाब में टकरा गया तक़सीम कर के दिल मिरा वो ज़ात में बिखरा गया — Alok Kumar 'Tabiib'

'तक़्सीम' का मूल अर्थ किसी चीज़ को भागों में बाँटना है, चाहे वह भौतिक हो या अमूर्त। कविता में, यह विभाजन अक्सर दिल, भावनाओं या भाग्य तक फैलता है, जो एक दर्दनाक और अपरिहार्य विखंडन का संकेत देता है।

'तक़्सीम' का उपयोग कवि अलगाव और तड़प के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह प्रेम से विभाजित दिल या सीमाओं से विभाजित भूमि की छवि को उभार सकता है। यह शब्द उदासी और चिंतन की भावना को वहन करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'तक़्सीम' हमारे जीवन को आकार देने वाले विभाजनों की एक मार्मिक याद दिलाता है। यह अलगाव की प्रकृति पर चिंतन के लिए आमंत्रित करता है।