Meaning of

ताक़

taq • طاق

ताख़; अलमारी; मेहराब

niche; alcove; arch

طاق; الماری; محراب

Arabic

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है — Allama Iqbal
मैं उन्हीं आबादियों में जी रहा होता कहीं तुम अगर हँसते नहीं उस दिन मेरी तक़दीर पर — Zia Mazkoor
मेरी तक़दीर में जलना है तो जल जाऊँगा तेरा वा'दा तो नहीं हूँ जो बदल जाऊँगा — Sahir Ludhianvi
मुस्तक़िल बोलता ही रहता हूँ कितना ख़ामोश हूँ मैं अंदर से — Jaun Elia
हिम्मत, ताकत, प्यार, भरोसा जो है सब इनसे ही है कुछ नंबर हैं जिन पर मैं ने अक्सर फोन लगाया है — Pratap Somvanshi
मैं ने मेहनत से हथेली पे लकीरें खींचीं वो जिन्हें कातिब-ए-तक़दीर नहीं खींच सका — Umair Najmi

मूल रूप से 'ताक़' का अर्थ है एक ताख़ या अलमारी, जो पारंपरिक वास्तुकला में पाई जाती है। यह एक महत्वपूर्ण स्थान है, एक बड़े ढांचे के भीतर एक छोटा पवित्र स्थान। कविता में, यह शब्द एक छिपे हुए, पवित्र स्थान का विचार प्रस्तुत करता है, एक ऐसा स्थान जो चिंतन या स्मृति का प्रतीक है।

'ताक़' का उपयोग कवि अक्सर आत्मा के छिपे हुए हिस्से या प्रिय स्मृति के प्रतीक के रूप में करते हैं। यह शरण या आत्मनिरीक्षण का स्थान हो सकता है। यह शब्द खुले स्थानों के विपरीत है, जो अंतरंगता और गोपनीयता को उजागर करता है।

'ताक़' की शांति में, दिल की गहरी फुसफुसाहट की गूंज मिलती है।