Meaning of

त'अल्लुक़

t'alluq • تعلق

संबंध; जुड़ाव

relationship; connection

رشتہ; تعلق

Arabic

कितने रिश्तों का मैं ने भरम रख लिया
इक तअल्लुक़ से दामन छुड़ाते हुए

7

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भरे हुए जाम पर सुराही का सर झुका तो बुरा लगेगा
जिसे तेरी आरज़ू नहीं तू उसे मिला तो बुरा लगेगा

ये आख़िरी कंपकंपाता जुमला कि इस तअ'ल्लुक़ को ख़त्म कर दो
बड़े जतन से कहा है उस ने नहीं किया तो बुरा लगेगा

61

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हम हैं सूखे हुए तालाब पे बैठे हुए हंस
जो तअ'ल्लुक़ को निभाते हुए मर जाते हैं

48

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इसीलिए तो किसी को बताने वाला नहीं
कि तेरा मेरा तअल्लुक़ ज़माने वाला नहीं

पलट के आ ही गए हो तो इतना ध्यान रहे
तुम्हारा दोस्त हूँ लेकिन पुराने वाला नहीं

39

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बस एक रस्म-ए-तअल्लुक़ निभाने बैठे हैं
वगरना दोनों के कप में ज़रा भी चाय नहीं

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न जाने ख़त्म हुई कब हमारी आज़ादी
तअल्लुक़ात की पाबंदियाँ निभाते हुए

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'फ़राज़' तर्क-ए-त'अल्लुक़ तो ख़ैर क्या होगा
यही बहुत है कि कम कम मिला करो उस से

26

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'मीर' से बैअत की है तो 'इंशा' मीर की बैअत भी है ज़रूर
शाम को रो रो सुब्ह करो अब सुब्ह को रो रो शाम करो

20

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जुर्म की तरह मोहब्बत को छुपा रक्खा है
हम गुनहगार नहीं हैं ये बताएँ किस को

रूठ जाते तो मनाना कोई दुश्वार न था
वो तअ'ल्लुक़ ही न रक्खें तो मनाएँ किस को

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तमाम शहर को तारीकियों से शिकवा है
मगर चराग़ की बैअत से ख़ौफ़ आता है

19

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कितने रिश्तों का मैं ने भरम रख लिया
इक तअल्लुक़ से दामन छुड़ाते हुए

7

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भरे हुए जाम पर सुराही का सर झुका तो बुरा लगेगा
जिसे तेरी आरज़ू नहीं तू उसे मिला तो बुरा लगेगा

ये आख़िरी कंपकंपाता जुमला कि इस तअ'ल्लुक़ को ख़त्म कर दो
बड़े जतन से कहा है उस ने नहीं किया तो बुरा लगेगा

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'त'अल्लुक़' शब्द एक बंधन या संबंध को दर्शाता है, जो अक्सर भौतिक से परे जाकर भावनात्मक और आध्यात्मिक संबंधों को समेटता है। अपने मूल अर्थ में, यह उन जटिल संबंधों के जाल को संदर्भित करता है जो मानव अनुभव को परिभाषित करते हैं। कविता ने इस अवधारणा का विस्तार करके उन अदृश्य धागों की खोज की है जो आत्माओं को बांधते हैं, उन अदृश्य धाराओं को जो दिलों के बीच बहती हैं।

कवि अक्सर 'त'अल्लुक़' का उपयोग मानव संबंधों की जटिलताओं में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो संबंध के सार को पकड़ता है, चाहे वह प्रेमियों, दोस्तों, या यहां तक कि विरोधियों के बीच हो। इस शब्द का उपयोग अलगाव या परायापन के विषयों की खोज के लिए भी किया जा सकता है, बंधनों की नाजुकता को उजागर करते हुए।

कविता के क्षेत्र में, 'त'अल्लुक़' हमारे जीवन को परिभाषित करने वाले असंख्य संबंधों का प्रतिबिंब बन जाता है। यह हृदय की एकता और समझ की लालसा को व्यक्त करता है।