Meaning of

दर्पण

darpan • درپن

आईना; प्रतिबिंब

mirror; reflection

آئینہ; عکس

Sanskrit

दर्पण उस का चाँदी सा है
सोने सा है चेहरा उस का

बातें उस की फूलों जैसी
और बगीचा गेहना उस का

1

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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है
उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है

किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने
प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है

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बात ज़रा आगे बढ़ सकती है 'दर्पन'
अब इक नंबर डायल भी हो सकता है

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बहुत मैं हिम्मत भी कर के 'दानिश' सभी को दर्पण दिखा रहा हूँ
मरा पड़ा है यहाँ का मुंसिफ़ यही तो मैं सच बता रहा हूँ

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ये न पूछो आत्म क्या है
देह का दर्पण समझ लो

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प्रेम राधा प्रेम मोहन है
प्रेम स्याही प्रेम दरपन है

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हमारे प्रेम का तुम ने विसर्जन कर दिया होगा
हमारा टूटना तय था कि दरपन कर दिया होगा

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तन छुपाऊँ मन छुपाऊँ क्या करूँँ दर्पण छुपाऊँ
हो रहा ज़ाहिर तू सब सेे कैसे ये जीवन छुपाऊँ

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मेरे क़रीब था मगर आँसू नहीं दिखे
इतना बदल गया मेरा दर्पण अजीब है

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आसमान में चाँद खिला है देख ज़रा
चल ऐसा कर दर्पन में ख़ुद को ही देख

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दर्पण उस का चाँदी सा है
सोने सा है चेहरा उस का

बातें उस की फूलों जैसी
और बगीचा गेहना उस का

1

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जब भी उस की गली में भ्रमण होता है
उस के द्वार पर आत्मसमर्पण होता है

किस किस से तुम दोष छुपाओगे अपने
प्रिये अपना मन भी दर्पण होता है

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'दर्पण' शब्द केवल भौतिक रूपों को नहीं, बल्कि भीतर छिपे गहरे सत्य को भी दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर आत्मनिरीक्षण और आत्मबोध का प्रतीक होता है।

कवि 'दर्पण' का उपयोग पहचान और सत्य के विषयों में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह आत्मा की समझ की खोज के लिए एक रूपक हो सकता है।

कविता में, 'दर्पण' आंतरिक आत्मा के लिए एक द्वार के रूप में कार्य करता है, जो प्रतिबिंब और रहस्योद्घाटन को आमंत्रित करता है।