Meaning of

दिल-शिकस्ता

dil-shikasta • دل شکستہ

दिल टूटा हुआ; गहरे दुखी

broken-hearted; deeply saddened

دل شکستہ; گہرے غمگین

Persian

न बदली है ज़मीं ये और ये अंबर नहीं बदला
तुम्हारी याद बसती है तभी तो घर नहीं बदला

न कर ले फ़ोन वो इक बे-वफ़ा सा इश्क़ भूले से
बहुत बदले हैं मोबाइल मगर नंबर नहीं बदला

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बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका

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कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला
और डूबने वालों का जज़्बा भी नहीं बदला

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ज़िंदगी काटी हिज्र में लेकिन
मौत के दस्तरस नहीं काटी

उस ने डीपी ही बदली जज साहिब
इश्क़ में उस ने नस नहीं काटी

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बस इतनी सी मेरी तक़दीर बदली
कभी ज़िंदाँ कभी ज़ंजीर बदली

न इन आँखों ने अपने ख़्वाब बदले
न ख़्वाबों ने कोई ता'बीर बदली

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दर-ब-दर किसी जानिब रोज़ चल रहा हूँ मैं
इक अज़ीब सूरत में ख़ुद ही ढल रहा हूँ मैं

कौन जल गया अंदर कौन मर गया मुझ
में
किस की मौत पर तन्हा रोज़ जल रहा हूँ मैं

इतना कहने पर भी जब बदली ही नहीं दुनिया
बे-वजह ही ख़ुद को फिर क्यूँ बदल रहा हूँ मैं

ख़ाक हो चुका है दिल चल रही मिरी साँसें
रफ़्ता रफ़्ता ही ख़ुद के दिन निगल रहा हूँ मैं

ज़िंदगी भला अब ये किस तरह बसर होगी
आज कल ग़मों से भी कब बहल रहा हूँ मैं

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ग़ज़ल के क़ाफ़िए बदले, ग़ज़ल बदली
ग़ज़ल के फिर मआ'नी भी नए रक्खे

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दिल-शिकस्ता हो गया है और फिर भी जल रहा है
एक ग़म है जो कहीं दिल में हमारे पल रहा है

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मिरी जगह कोई और उस की जगह कोई और
कहानी तो नहीं बदली बदल गए किरदार

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इक मैं हूँ जिस सेे डीपी तक नईं बदली जाती
इक वो है जो हर इक दिन महबूब बदलता है

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न बदली है ज़मीं ये और ये अंबर नहीं बदला
तुम्हारी याद बसती है तभी तो घर नहीं बदला

न कर ले फ़ोन वो इक बे-वफ़ा सा इश्क़ भूले से
बहुत बदले हैं मोबाइल मगर नंबर नहीं बदला

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बुरी सरिश्त न बदली जगह बदलने से
चमन में आ के भी काँटा गुलाब हो न सका

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'दिल-शिकस्ता' शब्द दुख से टूटे हुए दिल की मार्मिक छवि उत्पन्न करता है। यह गहरे भावनात्मक दर्द और असुरक्षा के सार को पकड़ता है, जो अक्सर प्रेम और हानि से जुड़ा होता है।

कवि 'दिल-शिकस्ता' का उपयोग गहरे दुख और भावनात्मक उथल-पुथल को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह दिल टूटने और अधूरी इच्छाओं के विषयों से निपटने वाले छंदों में एक पसंदीदा है।

कविता में, 'दिल-शिकस्ता' दिल के विलाप की स्थायी शक्ति का प्रमाण है।