Meaning of

दुश्मन-ए-जाँ

dushman-e-jaan • دشمن جاں

जीवन का दुश्मन; जानलेवा

enemy of life; life-threatening

زندگی کا دشمن; جان لیوا

Persian

तुम्हारे दुश्मन-ए-जाँ ग़ैर हैं शजर साहब
हमारे अपने ही अहबाब दुश्मन-ए-जाँ हैं

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कर दिया क़ुर्बान इक ख़्वाहिश मियाँ
दुश्मन-ए-जाँ अब मनाओ जश्न तुम

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किस घड़ी में ख़ुशी तू मनाएगा शुभ
वक़्त से रेस कैसे लगाएगा शुभ

दुश्मन-ए-जाँ तो घरवाले हैं तेरे अब
रिश्ता-ए-ख़ूँ में तू मात खाएगा शुभ

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दुश्मन-ए-जाँ ही सही साथ तो इक उम्र का है
दिल से अब दर्द की रुख़्सत नहीं देखी जाती

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ज़ुल्फ़ जब उस की परेशान हुआ करती थी
शा'इरी का नया उनवान हुआ करती थी

आज जो दुश्मन-ए-जाँ मेरी बनी फिरती है
यार वो लड़की मेरी जान हुआ करती थी

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माँ बुलाती है मेरी यूसुफ़-ए-सानी कह कर
भाई सब दुश्मन-ए-जानी की तरह देखें हैं

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दिल को जब तुझ सेे बिछड़ने का गुमाँ होने लगा
क़ाफ़िला आँखों से अश्कों का रवाँ होने लगा

मैं ने बस इतना कहा था के मेरी जान हो तुम
सुनके ये बात जहाँ दुश्मन-ए-जाँ होने लगा

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रक़ीब कर लिया ख़ुश हो के दुश्मन-ए-जाँ को
यूँँ इंतिक़ाम-ए-मोहब्ब्त लिया गया हम सेे

हमारे दिल पे क़यामत गुज़र गई मुर्शिद
हमारा चाहने वाला जुदा हुआ हम सेे

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तुम्हारे दुश्मन-ए-जाँ ग़ैर हैं शजर साहब
हमारे अपने ही अहबाब दुश्मन-ए-जाँ हैं

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कर दिया क़ुर्बान इक ख़्वाहिश मियाँ
दुश्मन-ए-जाँ अब मनाओ जश्न तुम

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दुश्मन-ए-जाँ अपने मूल में एक भयंकर शत्रु की छवि प्रस्तुत करता है, जो जीवन के मूल को ही चुनौती देता है। कविता में, यह शब्द अक्सर अपने शाब्दिक अर्थ से आगे बढ़कर किसी भी गहरी भावनात्मक या अस्तित्वगत खतरे का रूपक बन जाता है।

कवि अक्सर 'दुश्मन-ए-जाँ' का उपयोग एक प्रेमी का वर्णन करने के लिए करते हैं जिसकी भावनाएँ प्रबल होती हैं। यह आंतरिक संघर्षों या सामाजिक दबावों को भी दर्शा सकता है जो किसी की शांति को खतरे में डालते हैं।

कविता में, 'दुश्मन-ए-जाँ' प्रेम और खतरे के बीच के नाजुक संतुलन का प्रतीक बन जाता है। यह हमें जुनून और खतरे के बीच की पतली रेखा की याद दिलाता है।