किस घड़ी में ख़ुशी तू मनाएगा शुभवक़्त से रेस कैसे लगाएगा शुभदुश्मन-ए-जाँ तो घरवाले हैं तेरे अबरिश्ता-ए-ख़ूँ में तू मात खाएगा शुभ— Shubham Rai 'shubh'