Meaning of

दोज़ख

dozakh • دوزخ

नरक; यातना

hell; torment

جہنم; عذاب

Persian

उन से दोज़ख़ में पूछ बैठा हूँ शैख़ जी आप और यहाँ कैसे — Abdulla Asif
जाने वाले कह पाते तो कहते आने वालों से दुनिया दोज़ख़ जैसी ही है बस में हो तो मत आना — Abdulla Asif
बस वही लोग जन्नती होंगे और सारे ही दोज़ख़ी होंगे — Afzal Sultanpuri
तब जा के कहीं ज़ाबित-ओ-मज़बूत हुए हैं हम साल कई आतिश-ए-दोज़ख़ में जले हैं — Meem Maroof Ashraf
यही जन्नत है जो हासिल हो सुकून-ए-ख़ातिर और दोज़ख़ यही दुनिया अगर आराम नहीं — Safi Lakhnavi
बच्चों को मालूम है दुनिया दोज़ख है पैदा होते ही सब रोने लगते हैं — Lakhan Vaishnav "Aasmaan"
हो गई यार ये तो दोज़ख़ सी ज़िंदगी काश ज़िंदगी रहती — Abhishek Bhadauria 'Abhi'

दोज़ख शब्द एक अग्निमय अधोलोक की छवि प्रस्तुत करता है, जहाँ अनंत पीड़ा और दंड का वास होता है। कविता में, यह अक्सर आत्मा के आंतरिक संघर्षों और यातनाओं का प्रतीक होता है, निराशा और निराशा की स्थिति को दर्शाता है।

कवि 'दोज़ख' का उपयोग भावनात्मक पीड़ा की गहराई को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह स्वर्गीय छवियों के साथ विरोधाभास करता है ताकि मानव अनुभव की द्वैतता को उजागर किया जा सके। अक्सर, इसका उपयोग एकतरफा प्रेम या अस्तित्वगत भय के दर्द को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

'दोज़ख' अपनी अग्निमय छवि में मानव पीड़ा के सार को पकड़ता है। यह हृदय की परीक्षाओं के लिए एक शक्तिशाली रूपक बना रहता है।