Meaning of

नश्शा

nashsha • نشہ

मदहोशी; उल्लास

intoxication; euphoria

نشہ; سرور

Arabic

तुम्हारा प्यार तो साँसों में साँस लेता है
जो होता नश्शा तो इक दिन उतर नहीं जाता

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ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर
ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो

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मुझे शराब पिलाई गई है आँखों से
मेरा नशा तो हज़ारों बरस में उतरेगा

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गुलाब चाँदनी-रातों पे वार आए हम
तुम्हारे होंटों का सदक़ा उतार आए हम

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ये कैसा नश्शा है मैं किस अजब ख़ुमार में हूँ
तू आ के जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूँ

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नशा पिला के गिराना तो सब को आता है
मज़ा तो तब है कि गिरतों को थाम ले साक़ी

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भाई बहनों की मोहब्बत का नशा मत पूछिए
बे-तकल्लुफ़ हो गए तो गुदगुदी तक आ गए

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ग़ुरूर-ए-लुत्फ़-ए-साक़ी नश्शा-ए-बे-बाकी-ए-मस्ताँ
नम-ए-दामान-ए-इस्याँ है तरावत मौज-ए-कौसर की

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वो नशा है के ज़बाँ अक़्ल से करती है फ़रेब
तू मिरी बात के मफ़्हूम पे जाता है कहाँ

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ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो
नश्शा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें

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तुम्हारा प्यार तो साँसों में साँस लेता है
जो होता नश्शा तो इक दिन उतर नहीं जाता

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ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर
ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो

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'नश्शा' मूल रूप से नशीले पदार्थों या भावनाओं से उत्पन्न मदहोशी की स्थिति को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर उस प्रचंड आनंद या परमानंद का प्रतीक होता है जो सामान्य अनुभव से परे होता है, आनंदमय आत्मसमर्पण के क्षणों को पकड़ता है।

कवि 'नश्शा' का उपयोग उन्नत भावनात्मक अवस्थाओं को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह प्रेम के उल्लास, खोज की उत्तेजना, या आध्यात्मिक जागृति के आनंद को चित्रित कर सकता है। यह संयम के विपरीत है, पारलौकिकता के आकर्षण को उजागर करता है।

कविता में, 'नश्शा' पाठकों को परमानंद की सीमाओं का अन्वेषण करने के लिए आमंत्रित करता है। यह उन क्षणों का उत्सव है जहाँ वास्तविकता सपने में धुंधली हो जाती है।