Meaning of

नेह

neh • نہہ

स्नेह; प्रेम; कोमलता

affection; love; tenderness

محبت; پیار; نرمی

Sanskrit

निहारा था बड़ी शिद्दत से उस ने इक दफ़ा मुझ को
तभी नज़रों में उस की मैं ने पूरा खो दिया ख़ुद को

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एक अजब सानेहा गुज़रा है मेरे माज़ी में
मेरी दिलचस्पी ख़त्म हो गई है शादी में

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अब सुलगती है हथेली तो ख़याल आता है
वो बदन सिर्फ़ निहारा भी तो जा सकता था

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अजीब सानेहा मुझ पर गुज़र गया यारो
मैं अपने साए से कल रात डर गया यारो

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साँवले तन पे ग़ज़ब धज है बसंती शाल की
जी में है कह बैठिए अब जय कनहय्या लाल की

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रहते थे कभी जिन के दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह
बैठे हैं उन्हीं के कूचे में हम आज गुनहगारों की तरह

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ले के सहारा सच्चाई का मंचों पर
अंदर की सब राज़ दलाली खोल दिया

नेहा जी ने अंबर जी को सलीक़े से
मुँह पे यूँँ सरकारी औरत बोल दिया

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ठोकर लगेगी और गिरेंगे हज़ार बार
हटकर चलेंगे गर कभी अपनी डगर से हम

नवनीत अब है रौशनी में तीरगी नेहाँ
डरने लगे हैं आज बहुत ही सहरस हम

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मैं ने तेरा नाम लिखा है शजरों पर
उन का हर इक फूल निहारा जाएगा

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हम नेक करेंगे तुम सेे पूछेंगे नइँ
हम स्नेह करेंगे तुम सेे रूठेंगे नइँ

तुम रखना याद फकत मेरी चाहत को
हम बस अब इश्क़ करेंगे टूटेंगे नइँ

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निहारा था बड़ी शिद्दत से उस ने इक दफ़ा मुझ को
तभी नज़रों में उस की मैं ने पूरा खो दिया ख़ुद को

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एक अजब सानेहा गुज़रा है मेरे माज़ी में
मेरी दिलचस्पी ख़त्म हो गई है शादी में

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'नेह' शब्द गहरे स्नेह और कोमलता का भाव व्यक्त करता है। यह वह कोमल, पोषक प्रेम है जो संबंधों को बांधता है और आत्मा को शांत करता है। कविता में, यह अक्सर प्रेम की पवित्रता और मासूमियत का प्रतीक होता है, जो वास्तविकता की कठोरता से अछूता होता है।

कवि अक्सर 'नेह' का उपयोग प्रेम के कोमल बंधनों को चित्रित करने के लिए करते हैं। इसका उपयोग प्रेमियों के बीच अनकही कोमलता, मौन समझ को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

कविता में, 'नेह' प्रेम की मूक फुसफुसाहट है, हृदय की असीम स्नेह क्षमता की कोमल याद दिलाता है।