ठोकर लगेगी और गिरेंगे हज़ार बारहटकर चलेंगे गर कभी अपनी डगर से हमनवनीत अब है रौशनी में तीरगी नेहाँडरने लगे हैं आज बहुत ही सहरस हम— Navneet krishna