Meaning of

पज़ीराई

paziraai • پذیرائی

स्वागत; स्वीकृति; ग्रहण

reception; acceptance; welcome

پذیرائی; قبولیت; خیرمقدم

Persian

मुड़ के भी देखा नहीं जाते हुए उस ने हमें
रह गई होगी कमी कोई पज़ीराई में

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कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
उस ने ख़ुश्बू की तरह मेरी पज़ीराई की

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जब सर-ए-शाम पजीराई-ए-फ़न होती है
शाहज़ादी को कनीज़ों से जलन होती है

ले तो आया हूँ तुझे घेर के अपनी जानिब
आगे इंसान की अपनी भी लगन होती है

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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इश्क़ वालों को बुरा कहना भी
हुस्न वालों की पज़ीराई है

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उस ने आगाज़-ए-पज़ीराई किया है ऐसे
और ठहरने को नहीं करता है दिल अब मेरा

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मुड़ के भी देखा नहीं जाते हुए उस ने हमें
रह गई होगी कमी कोई पज़ीराई में

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कू-ब-कू फैल गई बात शनासाई की
उस ने ख़ुश्बू की तरह मेरी पज़ीराई की

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'पज़ीराई' मूल रूप से किसी का स्वागत या ग्रहण करने की क्रिया को दर्शाता है। कविता में, यह स्वीकृति की गर्मजोशी, स्वागत के आनंद, और अपनापन के आराम को समेटे हुए है।

कवि 'पज़ीराई' का उपयोग स्वीकृति और अपनापन के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर मानवीय संबंधों की गर्मजोशी और पारस्परिक समझ में पाए जाने वाले आनंद का प्रतीक है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'पज़ीराई' स्वीकृति के कोमल आलिंगन का प्रतीक है, जो मानवीय संबंध की शक्ति का प्रमाण है।