Meaning of

पस

pas • پس

तब; इसलिए; इस कारण

then; so; therefore

پھر; اس لئے; اس وجہ سے

Persian

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा — Allama Iqbal
तारीख़ आ गई है उधर कार्ड छप गए अब कब कहेगी तुझ को वो लड़का नहीं पसंद — Kushal Dauneria
धोखा है इक फ़रेब है मंज़िल का हर ख़याल सच पूछिए तो सारा सफ़र वापसी का है — Rajesh Reddy
सादा हूँ और ब्रैंड्स पसंद नहीं मुझ को मुझ पर अपने पैसे ज़ाया' मत करना — Ali Zaryoun
अब हमें देख के लगता तो नहीं है लेकिन हम कभी उस के पसंदीदा हुआ करते थे — Jawwad Sheikh
किसी बहाने से उस की नाराज़गी ख़त्म तो करनी थी उस के पसंदीदा शाइ'र के शे'र उसे भिजवाए हैं — Ali Zaryoun

'पस' अपने मूल अर्थ में परिणाम या नतीजे का भाव देता है। यह विचारों को जोड़ने वाला शब्द है, जो एक विचार को उसके स्वाभाविक निष्कर्ष तक ले जाता है। कविता में, यह एक कोमल संकेत बन जाता है, पाठक को घटनाओं और भावनाओं के विकास पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।

कवि 'पस' का उपयोग कारण और प्रभाव की कथा बुनने के लिए करते हैं। यह अक्सर उन छंदों में दिखाई देता है जो भाग्य की अनिवार्यता या प्रेम के कोमल विकास का अन्वेषण करते हैं। यह शब्द एक धुरी के रूप में कार्य करता है, पाठक का ध्यान एक भावनात्मक स्थिति से दूसरी ओर मोड़ता है।

कविता के क्षेत्र में, 'पस' एक कोमल मार्गदर्शक है, जो पाठक को भावनाओं की भूलभुलैया के माध्यम से ले जाता है। यह संक्रमण, गति और शांत चिंतन का शब्द है।