Meaning of

पाक़

paak • پاک

शुद्ध; स्वच्छ; पवित्र

pure; clean; sacred

پاک; صاف; مقدس

Persian

दिल सोज़ से ख़ाली है निगह पाक नहीं है फिर इस में अजब क्या कि तू बेबाक नहीं है — Allama Iqbal
मोहब्बत एक पाकीज़ा अमल है इस लिए शायद सिमट कर शर्म सारी एक बोसे में चली आई — Munawwar Rana
कोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक से ये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फ़ासले से मिला करो — Bashir Badr
ये गहरा राज़ है इस का बदन को खा ही जाती है मोहब्बत पाक होकर भी हवस तक आ ही जाती है — ALI ZUHRI
कोई तो पाकीज़ा सिफ़त पलकों में उस की थी कहीं पलकें उठीं तो चाँदनी हम ने बिखरते देखी है — Divya 'Kumar Sahab'

'पाक़' शब्द पवित्रता और पवित्रता का प्रतीक है। कविता में, यह अक्सर एक निर्मल हृदय या दिव्य उपस्थिति का प्रतीक होता है। यह आध्यात्मिक स्वच्छता और नैतिक अखंडता का भाव प्रकट करता है।

कवि 'पाक़' का उपयोग प्रेम की पवित्रता या प्रिय की आत्मा की पवित्रता का वर्णन करने के लिए करते हैं। यह प्रकृति की पवित्रता या किसी पवित्र स्थान का भी संकेत दे सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'पाक़' हमारे भीतर और हमारे चारों ओर निवास करने वाली दिव्य पवित्रता की एक कोमल याद दिलाता है।