Meaning of

पैरहन

pairhan • پیرہن

वस्त्र; पोशाक

garment; attire

لباس; پوشاک

Persian

बदन पे ओढ़ लिए शूल, पैरहन के लिए
शहीद कितने ही गुल हो गए चमन के लिए

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निकहत-ए-पैरहन से उस गुल की
सिलसिला बे-सबा रहा मेरा

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आते हुए मिले भी थे तुम किसी से,बोलो
सचमुच नहीं तो ख़ुद को बे-पैरहन दिखाओ

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हरारत कर कोई, मैं तेरे दिल में घर बना लूँ फिर
तेरी आँखें, तेरी मुस्कान, तेरा दिल संवारूँ फिर

कभी बे पैरहन जब तू मेरे आग़ोश में आए
गले लग कर मैं, तेरे जिस्म का नक़्शा उतारूँ फिर

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इश्क़ तब तक ही बस पाक है
पैरहन में वो है जब तलक

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ये काम ज़ाहिदों के मैं ख़िलाफ़ कर रहा हूँ
सनम के घर का मुसलसल तवाफ़ कर रहा हूँ

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साँसें भरता छोड़ता ओढ़े हुए मैला दुशाला
जो फ़क़ीरी ठान कर बैठा वो बे-कल है नहीं था

पैरहन से लग रहा होगा वो दानिश-मंद हर-सू
क्या कहूँ वो शख़्स बा-किरदार अव्वल है नहीं था

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ढल गया पैरहन में वो तागा
जिस सेे होकर सलाइयाँ निकलीं

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पहना रहा हूँ दर्द को लफ़्ज़ों का पैरहन
मैं भी जनाब-ए-मीर सा फ़नकार हो गया

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मौत आने पर बदलती, रूह अपना पैरहन
क्या पता था रूह मुझ को, छोड़ देगी जीते जी

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बदन पे ओढ़ लिए शूल, पैरहन के लिए
शहीद कितने ही गुल हो गए चमन के लिए

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निकहत-ए-पैरहन से उस गुल की
सिलसिला बे-सबा रहा मेरा

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'पैरहन' शब्द वस्त्र की छवि उत्पन्न करता है, जो केवल शारीरिक आवरण नहीं है, बल्कि पहचान और उन भूमिकाओं का रूपक है जिन्हें हम अपनाते हैं। कविता में, यह अक्सर व्यक्तित्व की परतों और मुखौटों का प्रतीक होता है।

कवि 'पैरहन' का उपयोग पहचान, परिवर्तन और मानव प्रकृति की द्वैतता के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह बाहरी रूप और आंतरिक वास्तविकता के बीच के अंतर का संकेत दे सकता है।

कविता में, 'पैरहन' पहचान की जटिलताओं और जीवन के रंगमंच में निभाई जाने वाली भूमिकाओं की खोज के लिए एक कैनवास बन जाता है।