Meaning of

पैरहन

pairhan • پیرہن

वस्त्र; पोशाक

garment; attire

لباس; پوشاک

Persian

निकहत-ए-पैरहन से उस गुल की सिलसिला बे-सबा रहा मेरा — Jaun Elia
ये काम ज़ाहिदों के मैं ख़िलाफ़ कर रहा हूँ सनम के घर का मुसलसल तवाफ़ कर रहा हूँ — Aamir Rahmati
ढल गया पैरहन में वो तागा जिस सेे होकर सलाइयाँ निकलीं — Ajeetendra Aazi Tamaam
मौत आने पर बदलती, रूह अपना पैरहन क्या पता था रूह मुझ को, छोड़ देगी जीते जी — Dr Bhagyashree Joshi
आते हुए मिले भी थे तुम किसी से,बोलो सचमुच नहीं तो ख़ुद को बे-पैरहन दिखाओ — Satyam Bhaskar "Bulbul"
इश्क़ तब तक ही बस पाक है पैरहन में वो है जब तलक — Kartik tripathi
पहना रहा हूँ दर्द को लफ़्ज़ों का पैरहन मैं भी जनाब-ए-मीर सा फ़नकार हो गया — Shajar Abbas
बदन पे ओढ़ लिए शूल, पैरहन के लिए शहीद कितने ही गुल हो गए चमन के लिए — Shakl e Alfaaz

'पैरहन' शब्द वस्त्र की छवि उत्पन्न करता है, जो केवल शारीरिक आवरण नहीं है, बल्कि पहचान और उन भूमिकाओं का रूपक है जिन्हें हम अपनाते हैं। कविता में, यह अक्सर व्यक्तित्व की परतों और मुखौटों का प्रतीक होता है।

कवि 'पैरहन' का उपयोग पहचान, परिवर्तन और मानव प्रकृति की द्वैतता के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह बाहरी रूप और आंतरिक वास्तविकता के बीच के अंतर का संकेत दे सकता है।

कविता में, 'पैरहन' पहचान की जटिलताओं और जीवन के रंगमंच में निभाई जाने वाली भूमिकाओं की खोज के लिए एक कैनवास बन जाता है।