
साँसें भरता छोड़ता ओढ़े हुए मैला दुशाला
जो फ़क़ीरी ठान कर बैठा वो बे-कल है नहीं था
पैरहन से लग रहा होगा वो दानिश-मंद हर-सू
क्या कहूँ वो शख़्स बा-किरदार अव्वल है नहीं था
— Karal 'Maahi'
Other sher from the same pen
Voices in the same orbit
Poetry by feeling