साँसें भरता छोड़ता ओढ़े हुए मैला दुशालाजो फ़क़ीरी ठान कर बैठा वो बे-कल है नहीं थापैरहन से लग रहा होगा वो दानिश-मंद हर-सूक्या कहूँ वो शख़्स बा-किरदार अव्वल है नहीं था— Karal 'Maahi'