Meaning of

फर्क़

farq • فرق

अंतर; भेद

difference; distinction

فرق; امتیاز

Arabic

ग़म-ए-फ़ुर्क़त का शिकवा करने वाली मेरी मौजूदगी में सो रही है — Jaun Elia
जाने से कोई फ़र्क़ ही उस के नहीं पड़ा क्या क्या समझ रहा था बिछड़ने के डर को मैं — Shariq Kaifi
हिन्दी में और उर्दू में फ़र्क़ है तो इतना वो ख़्वाब देखते हैं हम देखते हैं सपना — Unknown
उस के जाने और आने में फ़क़त ये फ़र्क़ है दूर जाती मौत है तो पास आती ज़िन्दगी — Divy Kamaldhwaj
ग़म और ख़ुशी में फ़र्क़ न महसूस हो जहाँ मैं दिल को उस मक़ाम पे लाता चला गया — Sahir Ludhianvi
मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का उसी को देख कर जीते हैं जिस काफ़िर पे दम निकले — Mirza Ghalib
मेरा हर दिन तेरी फ़ुर्क़त में बसर होता है यार होना तो नहीं चाहिए, पर होता है — Harman Dinesh
तमाम फ़र्क़ मोहब्बत में एक बात के हैं वो अपनी ज़ात का नईं है हम उस की ज़ात के हैं — Pallav Mishra

'फर्क़' शब्द संस्थाओं या विचारों के बीच सूक्ष्म या महत्वपूर्ण भेद का संकेत देता है। कविता में, यह अक्सर भावनाओं, दृष्टिकोणों, या अनुभवों में विरोधाभास को उजागर करता है।

कवि 'फर्क़' का प्रयोग पहचान और द्वैत के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह दिखावे और वास्तविकता के बीच के तनाव को उजागर कर सकता है।

काव्यात्मक परिदृश्य में, 'फर्क़' एकता और विभाजन के बीच के नाजुक संतुलन पर चिंतन को आमंत्रित करता है।