Meaning of

फर्ज़

farz • فرض

कर्तव्य; दायित्व; ज़िम्मेदारी

duty; obligation; responsibility

فرض; ذمہ داری; فریضہ

Arabic

यूँँ दिल तो पूरी ज़िंदगी जवान रहता है
हाँ फ़र्ज़ के वजह से किस को ध्यान रहता है

4

Download Image

आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर
फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं

दिन में सौ बार याद करता हूँ
पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं

78

Download Image

उन का जो फ़र्ज़ है वो अहल-ए-सियासत जानें
मेरा पैग़ाम मोहब्बत है जहाँ तक पहुँचे

32

Download Image

एक के घर की ख़िदमत की और एक के दिल से मोहब्बत की
दोनों फ़र्ज़ निभा कर उस ने सारी उम्र इबादत की

32

Download Image

अज़ल से मेरी हिफ़ाज़त का फ़र्ज़ है उन पर
सभी दुखों को मेरे आस-पास होना है

30

Download Image

बदन उतार के खूँटी पे टाँग आया हूँ
तुम्हारा फ़र्ज़ है मुझ को गले लगाने का

15

Download Image

आइना भी नहीं पकड़ पाता
मेरी इस फ़र्ज़ी मुस्कुराहट को

6

Download Image

हिज्र का फर्ज़ निभाया है मैं ने शिद्दत से
साल दो साल तलक मैं भी रहा हूँ तन्हा

ख़्वाब तुम ने जो दिखाए थे मुझे उल्फ़त में
मैं जनाज़े के तले उन के दबा हूँ तन्हा

6

Download Image

की दोस्ती जो यार निभाऊँगा मैं ज़रूर
ये फ़र्ज़ अपना आज चुकाऊँगा मैं ज़रूर

5

Download Image

इस दिल की जवानी के दिन तो यूँँ कम नहीं होते
हाँ फ़र्ज़ की ज़िम्मेदारी में मैं हम नहीं होते

4

Download Image

यूँँ दिल तो पूरी ज़िंदगी जवान रहता है
हाँ फ़र्ज़ के वजह से किस को ध्यान रहता है

4

Download Image

आप क्यूँँ रोएँगे मेरी ख़ातिर
फ़र्ज़ ये सारे इस ग़ुलाम के हैं

दिन में सौ बार याद करता हूँ
पासवर्ड सारे तेरे नाम के हैं

78

Download Image

'फर्ज़' शब्द नैतिक और सामाजिक ज़िम्मेदारी का भार लिए हुए है। कविता में, यह अक्सर व्यक्तिगत इच्छाओं और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच के तनाव को दर्शाता है, जो अपने कर्तव्यों को पूरा करने की आंतरिक संघर्ष को उजागर करता है।

'फर्ज़' का उपयोग कवि बलिदान और कर्तव्य के विषयों की खोज के लिए करते हैं। इसे अक्सर प्रेम या स्वतंत्रता के साथ विपरीत रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे एक मार्मिक तनाव उत्पन्न होता है। संदर्भ के अनुसार, यह सम्मान या बोझ की भावना को जागृत कर सकता है।

कविता में, 'फर्ज़' मानव स्थिति का प्रतिबिंब बन जाता है, जहाँ कर्तव्य अक्सर बलिदान के साथ चलता है।