Meaning of

फ़क्र

fakr • فکر

गर्व; गरिमा; आत्म-सम्मान

pride; dignity; self-respect

فخر; وقار; خودداری

Arabic

निगाह-ए-गर्म क्रिसमस में भी रही हम पर हमारे हक़ में दिसम्बर भी माह-ए-जून हुआ — Akbar Allahabadi
फ़िक्र-ए-ईजाद में गुम हूँ मुझे ग़ाफ़िल न समझ अपने अंदाज़ पर ईजाद करूँँगा तुझ को — Jaun Elia
फ़िक्र करता ही नहीं अब, याद रहता है यही कुछ भी अच्छा या बुरा हो, सोचते बस हैं तुझे — Divya 'Kumar Sahab'
वो मेरी फिक्र तो करता है मगर प्यार नहीं या'नी पाज़ेब में घुँघरू तो है झंकार नहीं — Harman Dinesh
दुनिया की फ़िक्र छोड़, न यूँँ अब उदास बैठ ये वक़्त रब की देन है, अम्मी के पास बैठ — Salman Zafar
मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया — Sahir Ludhianvi
कभी तुझ सेे मिलेंगे तो कहेंगे झूठ तुझ सेे हम न तेरी फ़िक्र करते हैं न तुझ को याद करते हैं — Sapna Moolchandani
थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई तमाम शब वो आए तो भी नींद न आई तमाम शब — Momin Khan Momin

फ़क्र एक गहरी गर्व की भावना है जो मात्र अहंकार से परे है। यह एक गरिमामय आत्म-जागरूकता है, जो व्यक्ति के मूल्य की पहचान करती है, जो विनम्र और भव्य दोनों है। कविता में, यह अक्सर मानव आत्मा की आंतरिक शक्ति और दृढ़ता को दर्शाता है।

कवि फ़क्र का उपयोग किसी पात्र के महान गर्व को व्यक्त करने या किसी अनसुने नायक की शांत गरिमा को उजागर करने के लिए करते हैं। यह विनम्रता के विषयों के साथ भी विपरीत हो सकता है, जिससे मानवीय भावनाओं का एक समृद्ध ताना-बाना बनता है।

फ़क्र आत्म-मूल्य की मौन गर्जना है, जो काव्यात्मक अभिव्यक्ति के गलियारों में गूंजती है।