Meaning of

फ़क्र

fakr • فکر

गर्व; गरिमा; आत्म-सम्मान

pride; dignity; self-respect

فخر; وقار; خودداری

Arabic

थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई तमाम शब
वो आए तो भी नींद न आई तमाम शब

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करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से
तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से

चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़
दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से

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वो मेरी फिक्र तो करता है मगर प्यार नहीं
या'नी पाज़ेब में घुँघरू तो है झंकार नहीं

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निगाह-ए-गर्म क्रिसमस में भी रही हम पर
हमारे हक़ में दिसम्बर भी माह-ए-जून हुआ

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दुनिया की फ़िक्र छोड़, न यूँँ अब उदास बैठ
ये वक़्त रब की देन है, अम्मी के पास बैठ

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फ़िक्र-ए-ईजाद में गुम हूँ मुझे ग़ाफ़िल न समझ
अपने अंदाज़ पर ईजाद करूँँगा तुझ को

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मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया
हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया

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फ़िक्र करता ही नहीं अब, याद रहता है यही
कुछ भी अच्छा या बुरा हो, सोचते बस हैं तुझे

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कभी तुझ सेे मिलेंगे तो कहेंगे झूठ तुझ सेे हम
न तेरी फ़िक्र करते हैं न तुझ को याद करते हैं

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जि
यूँँगी किस तरह तेरे बिना मत फिक्र कर इस की
गुज़रती जिस शहर से हूँ दिवाने छोड़ आती हूँ

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थी वस्ल में भी फ़िक्र-ए-जुदाई तमाम शब
वो आए तो भी नींद न आई तमाम शब

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करता नहीं ख़याल तेरा इस ख़याल से
तंग आ गया अगर तू मेरी देखभाल से

चल मेरे साथ और तबीयत की फ़िक्र छोड़
दो मील दूर है मेरा घर अस्पताल से

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फ़क्र एक गहरी गर्व की भावना है जो मात्र अहंकार से परे है। यह एक गरिमामय आत्म-जागरूकता है, जो व्यक्ति के मूल्य की पहचान करती है, जो विनम्र और भव्य दोनों है। कविता में, यह अक्सर मानव आत्मा की आंतरिक शक्ति और दृढ़ता को दर्शाता है।

कवि फ़क्र का उपयोग किसी पात्र के महान गर्व को व्यक्त करने या किसी अनसुने नायक की शांत गरिमा को उजागर करने के लिए करते हैं। यह विनम्रता के विषयों के साथ भी विपरीत हो सकता है, जिससे मानवीय भावनाओं का एक समृद्ध ताना-बाना बनता है।

फ़क्र आत्म-मूल्य की मौन गर्जना है, जो काव्यात्मक अभिव्यक्ति के गलियारों में गूंजती है।