Meaning of

फ़रोग़

farogh • فروغ

चमक; दीप्ति; समृद्धि

brightness; radiance; prosperity

چمک; روشنی; خوشحالی

Persian

आदतन तुम अपनी बातों से फिरोगे था पता
दिल है दिल का क्या करें बस इश्क़ की तामील की

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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का

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रुख़्सार पर है रंग-ए-हया का फ़रोग़ आज
बोसे का नाम मैं ने लिया वो निखर गए

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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का

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फिरोगे दिलों को मिलेगा न कोई
अगर बस चलेगा बसोगे नहीं तुम

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पुराने गीत चलाओ तो कुछ बात बने
हमारे साथ में गाओ तो कुछ बात बने

हमेशा नाज़ उठाते हैं हम आप के ही
कभी हम को भी मनाओ तो कुछ बात बने

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इक रोज़ मैं विदा हो जाऊँगा इस ज़हाँ से
फिर खोजते फिरोगे नभ में सितारों के बीच

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एक दिवाने की यादों में एक दिवानी रक़्स करेगी
सन्नाटे की तिर-किट-धिन पर रोज़ उदासी रक़्स करेगी

यार कहानी लिखने वाले, जल्दी मिलवा हम दोनों को
हम दोनों के मिलने पर ही तेरी कहानी रक़्स करेगी

मेरी ग़ज़लें तुम गाओ तो ख़ुशबू ख़ुशबू हो जाएगी
जैसे चम्पा के फूलों पर नन्ही तितली रक़्स करेगी

तानाशाह ने क्या सोचा था, शहज़ादी को बाँध सकेगा
प्यादे की धुन पर गाएगी, इश्क़ करेगी, रक़्स करेगी

इक मुद्दत से गुम सुम थी जो, पिया मिलन पर चहक उठी है
ढ़ोल नगाड़े बजवाओ अब, पागल लड़की रक़्स करेगी

हम दोनों के मिल जाने से झूम उठेगा सारा मथुरा
मोहन के काँधे पर सर रख राधा रानी रक़्स करेगी

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फ़ज़ा की गर्द में मुझ को फ़रोग़-ए-हुस्न दिखता है
बयारों से कभी पूछो वो कितनी ख़ूब-सूरत है

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खिला खिला वो आसमाँ फ़ज़ा लगे जमाल है
फ़रोग़ से ही हुस्न की सदा बड़ी कमाल है

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आदतन तुम अपनी बातों से फिरोगे था पता
दिल है दिल का क्या करें बस इश्क़ की तामील की

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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का

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फ़रोग़ शब्द एक ऐसे प्रकाश की छवि प्रस्तुत करता है जो परिदृश्य में फैलता है, अपने मार्ग में सब कुछ प्रकाशित करता है। कविता में, यह अक्सर आशा, विकास और जीवन की समृद्धि का प्रतीक होता है। यह जो दीप्ति प्रस्तुत करता है, वह केवल भौतिक नहीं है, बल्कि रूपकात्मक भी है, जो ज्ञान और आनंद के आंतरिक प्रकाश का प्रतिनिधित्व करता है।

कवि अक्सर 'फ़रोग़' का उपयोग एक नए युग के उदय या प्रेम के खिलने को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह अंधकार या निराशा के विपरीत भी हो सकता है, जो छाया पर प्रकाश की विजय को उजागर करता है।

फ़रोग़ काव्यात्मक परिदृश्य में एक प्रकाशस्तंभ है, जो पाठकों को प्रकाश और आशा की ओर ले जाता है।