Meaning of

फ़र्द

fard • فرد

व्यक्ति; इंसान; स्व

individual; person; self

فرد; انسان; خود

Arabic

देखा जो खा के तीर कमीं-गाह की तरफ़ अपने ही दोस्तों से मुलाक़ात हो गई — Hafeez Jalandhari
फिर धड़कते हैं दिल-ए-इंसाँ में फ़र्दा के ख़याल फिर हवाओं ने ज़मीं पर ला उतारा कोई ख़्वाब — Aslam Ansari
ओ पागल पागल फिरदे होंगे जो तेरे उत्थे मरदे होंगे — Afzal Sultanpuri
फ़र्दा हो कि पस-ए-फ़र्दा मुझ को अब उम्मीद नहीं — Lekhak Suyash
मुनफ़रिद ख़ुशबू है इस शजर की ऐसा लगता है उस ने छुआ हो — Shadab khan
फिरदौस ओ खुल्द जन्नत ओ कूचा ए जाने जाँ है लफ्ज़ चार, चारों का मतलब पर एक हैं — Shajar Abbas

'फ़र्द' का मूल अर्थ व्यक्ति या एकल इकाई है, जो किसी व्यक्ति की विशिष्टता और स्वायत्तता को दर्शाता है। कविता में, यह शब्द अक्सर एकांत, पहचान और आत्मा की आंतरिक दुनिया के विषयों को गहराई से व्यक्त करता है।

कवि 'फ़र्द' का उपयोग व्यक्तित्व की सार्थकता और भीतर की मौन संघर्षों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह सामूहिक शब्दों के विपरीत, आत्मा की एकाकी यात्रा को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'फ़र्द' एक दर्पण बन जाता है जो हमारे द्वारा तय किए गए एकाकी मार्गों को प्रतिबिंबित करता है।