नाज़ हर वक़्त तेरे कौन उठाएगा बता

अब मेरे बा'द तुझे कौन मनाएगा बता

अपने क़दमों को तो मैं गिन के रखूँ राहों में
चल के तू साथ कहाँ तक मेरे आएगा बता

इक मुझे छोड़ के हर सम्त नज़र तेरी गई
और कितना तू निगाहों से गिराएगा बता

मुझ पे इल्ज़ाम लगाने से ये पहले सुन ले
क्या करेगा जो तेरा नाम भी आएगा बता

आतिश-ए-इश्क़ में हम शौक़ से जल जाएँगे
खाक़ मेरी तू हवाओं में उड़ाएगा बता

हम ज़माने से भी लड़ जाएँ जो तेरी ख़ातिर
फ़र्द तू फ़र्ज़ मुहब्बत का निभाएगा बता

— Rajesh fard unnavi

More by Rajesh fard unnavi

Other sher from the same pen

See all from Rajesh fard unnavi →

Adaa Shayari

Shers of adaa.

All Adaa Shayari poetry →

Similar writers

Voices in the same orbit

Browse by mood

Poetry by feeling