उस की आँख का काला काजल पागल है
पल में कर देता है घाइल पागल है
वो है उड़ती तितली हाथ न आएगी
तू थामेगा उस का आँचल पागल है
धरती कब कहने वाली आओ बरसो
पर्वत पे बैठा ये बादल पागल है
ग़ैर हुई वो फिर भी उस की ही हसरत
सच में तू तो सब से अव्वल पागल है
उस का पूछा नाम सहेली से उस की
हाथ पकड़ कर बोली आ चल पागल है
इक वो ही अंजान वगरना इश्क़ में तो
उस की चूड़ी कंगन पायल पागल है
— Rajesh fard unnavi















