नाज़ हर वक़्त तेरे कौन उठाएगा बता
अब मेरे बाद तुझे कौन मनाएगा बता
अपने क़दमों को तो मैं गिन के रखूँ राहों में
चल के तू साथ कहाँ तक मेरे आएगा बता
इक मुझे छोड़ के हर सम्त नज़र तेरी गई
और कितना तू निग़ाहों से गिराएगा बता
मुझ पे इल्ज़ाम लगाने से ये पहले सुन ले
क्या करेगा जो तेरा नाम भी आएगा बता
आतिश-ए-इश्क़ में हम शौक़ से जल जाएँगे
खाक़ मेरी तू हवाओं में उड़ाएगा बता
हम ज़माने से भी लड़ जाएँ जो तेरी ख़ातिर
"फ़र्द"तू फ़र्ज़ मुहब्बत का निभाएगा बता
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