मिरी हालत पे यूँँ हालात रोए
कभी तो बात पे बिन बात रोए
मेरे हाथों को चूमा था जो तुम ने
बिछड़ कर तुम से मेरे हाथ रोए
तेरे जाने पे सब सपने अधूरे
कई दिन तक हमारे साथ रोए
किया था प्यार का इज़हार तुम से
नदामत में मेरे जज़्बात रोए
दिवाने जब न थे कितना सुकूँ था
दिवाने बन के हम दिन रात रोए
कहाँ था ज़िन्दगी भर साथ हँसना
कहाँ ऐसा हुआ लम्हात रोए
तेरे जाते हुए अच्छा नहीं था
सो हम जानाँ तेरे पश्चात रोए
— Rajesh fard unnavi















