jaise meri nigaah ne dekha na ho kabhi | जैसे मेरी निगाह ने देखा न हो कभी

  - Shad Azimabadi

जैसे मेरी निगाह ने देखा न हो कभी
महसूस ये हुआ तुझे हर बार देख कर

  - Shad Azimabadi

Nigaah Shayari

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    किसी की बर्क़-ए-नज़र से न बिजलियों से जले
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