Meaning of

फ़िराक़त

firaaqat • فراق

वियोग; तड़प

separation; longing

جدائی; تڑپ

Arabic

मैं तो शब-ए-फ़िराक़ था तुम एक उम्र थी
फिर भी ज़ियादा तुम से गुज़ारा गया मुझे

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सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़'
क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया

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गरेबाँ चाक, धुआँ, जाम, हाथ में सिगरेट
शब-ए-फ़िराक़, अजब हाल में पड़ा हुआ हूँ

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वो आ रहे हैं, वो आते हैं, आ रहे होंगे
शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने

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वो फ़िराक़ और वो विसाल कहाँ
वो शब-ओ-रोज़-ओ-माह-ओ-साल कहाँ

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मगर गुज़ारने वालों के दिन गुज़रते हैं
तेरे फ़िराक़ में यूँँ सुबह-ओ-शाम करते हैं

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शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई
दिल था कि फिर बहल गया जाँ थी कि फिर सँभल गई

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फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझ को रात भर रक्खा
कभी तकिया इधर रक्खा कभी तकिया उधर रक्खा

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शा
में किसी को माँगती हैं आज भी 'फ़िराक़'
गो ज़िंदगी में यूँँ मुझे कोई कमी नहीं

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आए थे हँसते खेलते मय-ख़ाने में 'फ़िराक़'
जब पी चुके शराब तो संजीदा हो गए

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मैं तो शब-ए-फ़िराक़ था तुम एक उम्र थी
फिर भी ज़ियादा तुम से गुज़ारा गया मुझे

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सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के 'फ़िराक़'
क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया

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मूल रूप में, 'फ़िराक़त' वियोग की पीड़ा और खालीपन को दर्शाता है। कविता ने इस भावना को और गहराई दी है, जहाँ अनुपस्थिति से उत्पन्न तड़प को कोमल और कष्टदायक दोनों रूपों में व्यक्त किया जाता है।

'फ़िराक़त' का उपयोग कवि अक्सर पीछे छूटे प्रेमी की मौन पुकार को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह मिलन की खुशी के विपरीत है, प्रेम की खट्टे-मीठे स्वभाव को उजागर करता है। यह शब्द एकाकी रातों और फुसफुसाती यादों की तस्वीर खींचता है।

कविता की दुनिया में, 'फ़िराक़त' प्रेम की द्वैतता का सार पकड़ता है। यह एक घाव है और हृदय की गहराई से महसूस करने की क्षमता की याद दिलाता है।