Meaning of

फ़िराक-ए-यार

firaak-e-yaar • فراق یار

प्रिय से वियोग; तड़प

separation from the beloved; longing

محبوب سے جدائی; تڑپ

Persian

फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझ को रात भर रक्खा कभी तकिया इधर रक्खा कभी तकिया उधर रक्खा — Ameer Minai
यूँँ तो फ़िराक़-ए-यार में क्या क्या नहीं किया लेकिन तुम्हारे जैसा तमाशा नहीं किया — Amaan Pathan
चराग़-ए-अश्क हैं दहलीज़-ए-चश्म पर रौशन फ़िराक़-ए-यार की मज्लिस है क़ल्ब-ए-मुज़्तर में — Shajar Abbas
अब की होली में रहा बे-कार रंग और ही लाया फ़िराक़-ए-यार रंग — Imam Bakhsh Nasikh
विसाल-ए-यार में जीना कोई कमाल नहीं फिराक़-ए-यार में जीना कमाल होता है — Shajar Abbas
अजीब हाल है मेरा फ़िराक़-ए-यार के बा'द खुली फ़ज़ाओ में घुट-घुट के मर रहा हूँ मैं — Shajar Abbas

'फ़िराक-ए-यार' प्रिय से वियोग की मार्मिक भावना को समेटे हुए है। यह उस दूरी के साथ आने वाले दिल के दर्द और तड़प को पकड़ता है। कविता में, यह प्रेम की अनुपस्थिति से उत्पन्न गहरी तड़प और दुःख को व्यक्त करने का माध्यम है, जो अक्सर एकांत और चिंतन की तस्वीर पेश करता है।

कवि 'फ़िराक-ए-यार' का उपयोग तड़प और वियोग के विषयों में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह अक्सर मिलन के क्षणों के विपरीत होता है, प्रेम की खट्टे-मीठे स्वभाव को उजागर करता है। यह शब्द प्रतीक्षा और आत्मचिंतन की छवियों को उकसाता है, प्रेम की अनुपस्थिति की स्थायी शक्ति का प्रमाण है।

कविता की बुनावट में, 'फ़िराक-ए-यार' तड़प और चिंतन के धागों को बुनता है। यह प्रेम के स्थायी प्रभाव की मार्मिक याद दिलाता है।