Meaning of

फातिहा

faatiha • فاتحہ

प्रारंभिक अध्याय; प्रार्थना; आह्वान

opening chapter; prayer; invocation

ابتدائی باب; دعا; مناجات

Arabic

फ़ातिहा पढ़ कि फूल रख मुझ पर आ गया है तो कुछ जता अफ़सोस — Siraj Faisal Khan
तेरी तस्वीर पर चढ़ा कर गुल इश्क़ की हम ने फ़ातिहा पढ़ दी — Shajar Abbas
शहर-ए-ख़ामोशाँ में वो फ़ातिहाँ पढ़कर बोले अज्र इन सूरहों का अल्लाह फ़ुलाँ तक पहुँचे — Shajar Abbas
रोग लग जाए जिसे भी मोहब्बत का यार उस का फातिहा तब पढ़ा जाए — Afzal Sultanpuri
मैं पाबंदी लगाता हूँ, हैं जो भी इश्क़ के ताजिर कोई भी फ़ातिहा पढ़ने न आए क़ब्र पर मेरे — A R Sahil "Aleeg"
हैं नहीं दुनिया में जिन के बाक़ियातुस्सालिहात कौन उन के फ़ातिहा में आएँगे बन कर हुजूम — Nityanand Vajpayee

'फातिहा' शब्द शुरुआत और आह्वान का भाव लिए हुए है। मूल रूप से यह क़ुरान के प्रारंभिक अध्याय को संदर्भित करता है, एक प्रार्थना जो आध्यात्मिक चिंतन के लिए स्वर सेट करती है। कविता में, यह यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है, दिव्य मार्गदर्शन के लिए एक आह्वान।

कवि 'फातिहा' का उपयोग एक नई शुरुआत या मार्गदर्शन की याचना के भाव को जगाने के लिए करते हैं। यह व्यक्तिगत परिवर्तन या आध्यात्मिक खोज की शुरुआत को चिह्नित कर सकता है। यह अंत के विपरीत, आशा और नवीनीकरण को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'फातिहा' शुरुआत की शक्ति की एक कोमल याद दिलाती है। यह हृदय की प्रकाश और समझ की अनंत खोज को संबोधित करती है।