Meaning of

बख़्शिश

bakshish • بخشش

उपहार; कृपा; अनुग्रह

gift; favor; grace

تحفہ; فضل; عنایت

Persian

छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये — Sahir Ludhianvi
ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल — "Nadeem khan' Kaavish"
इतना सुंदर रूप ख़ुदा ने ऐसे ही थोड़ी बख़्शा है नखरें कर तू रूठ मिरी जाँ ये तो तेरा हक़ बनता है — Sarvjeet Singh
ग़नीमत है की तेरे ग़म ने बख़्शा वगरना मैं तो ज़िंदा ही कहाँ था — Parwez Akhtar
ये भी ए'जाज़ मुझे इश्क़ ने बख़्शा था कभी उस की आवाज़ से मैं दीप जला सकता था — Ahmad Khayal
हुस्न बख़्शा जो ख़ुदा ने आप बख़्शें दीद अपनी आरज़ू–ए–चश्म पूरी हो मुकम्मल ईद अपनी — Dhiraj Singh 'Tahammul'
किसी के वास्ते तेरी फ़क़त इक दीद है बख़्शिश किसी के वास्ते मामूली सा बस इक बदन है तू — Kartik tripathi
ख़ुदा ने मुझ को भी इक शख़्स बख़्शा जो मुझे बस चाहेगा मेरा नहीं होगा — Chandan Sharma
हर शय पे दस्तकारियाँ करते हो बे-मिसाल बख़्शा है रब ने आप को दस्त-ए-हुनर कमाल — Ajeetendra Aazi Tamaam

'बख़्शिश' मूल रूप से एक उपहार या कृपा को दर्शाता है, जो अक्सर अनुग्रह और उदारता के साथ दिया जाता है। कविता में, यह दिव्य कृपा, जीवन के अप्रत्याशित आशीर्वाद, और उस दया का प्रतीक है जो भौतिक संपत्ति से परे है।

कवि 'बख़्शिश' का उपयोग उदारता और दिव्य हस्तक्षेप के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर कृतज्ञता और आध्यात्मिक समृद्धि के संदर्भों में प्रकट होता है।

'बख़्शिश' हमें देने और प्राप्त करने की सुंदरता की याद दिलाता है, जीवन के आशीर्वादों को पहचानने की ओर एक कोमल प्रेरणा।