Meaning of

बख़्शिश

bakshish • بخشش

उपहार; कृपा; अनुग्रह

gift; favor; grace

تحفہ; فضل; عنایت

Persian

हर शय पे दस्तकारियाँ करते हो बे-मिसाल
बख़्शा है रब ने आप को दस्त-ए-हुनर कमाल

2

Download Image

छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये

63

Download Image

ये भी ए'जाज़ मुझे इश्क़ ने बख़्शा था कभी
उस की आवाज़ से मैं दीप जला सकता था

26

Download Image

ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल
न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल

सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो
अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल

ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब
समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल

कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा
सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल

मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा
जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल

हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं
कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल

7

Download Image

हुस्न बख़्शा जो ख़ुदा ने आप बख़्शें दीद अपनी
आरज़ू–ए–चश्म पूरी हो मुकम्मल ईद अपनी

5

Download Image

कभी दरिया कभी तारों का मंज़र क़ैद करता हूँ
किसी क़े हुस्न का जादू नज़र भर क़ैद करता हूँ

मैं शाइ'र हूँ मुझे अल्लाह ने ऐसा हुनर बख्शा
मैं काग़ज़ की लकीरों में समुंदर क़ैद करता हूँ

4

Download Image

किसी के वास्ते तेरी फ़क़त इक दीद है बख़्शिश
किसी के वास्ते मामूली सा बस इक बदन है तू

3

Download Image

इतना सुंदर रूप ख़ुदा ने ऐसे ही थोड़ी बख़्शा है
नखरें कर तू रूठ मिरी जाँ ये तो तेरा हक़ बनता है

2

Download Image

ख़ुदा ने मुझ को भी इक शख़्स बख़्शा जो
मुझे बस चाहेगा मेरा नहीं होगा

2

Download Image

ग़नीमत है की तेरे ग़म ने बख़्शा
वगरना मैं तो ज़िंदा ही कहाँ था

2

Download Image

हर शय पे दस्तकारियाँ करते हो बे-मिसाल
बख़्शा है रब ने आप को दस्त-ए-हुनर कमाल

2

Download Image

छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये
क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये

63

Download Image

'बख़्शिश' मूल रूप से एक उपहार या कृपा को दर्शाता है, जो अक्सर अनुग्रह और उदारता के साथ दिया जाता है। कविता में, यह दिव्य कृपा, जीवन के अप्रत्याशित आशीर्वाद, और उस दया का प्रतीक है जो भौतिक संपत्ति से परे है।

कवि 'बख़्शिश' का उपयोग उदारता और दिव्य हस्तक्षेप के विषयों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर कृतज्ञता और आध्यात्मिक समृद्धि के संदर्भों में प्रकट होता है।

'बख़्शिश' हमें देने और प्राप्त करने की सुंदरता की याद दिलाता है, जीवन के आशीर्वादों को पहचानने की ओर एक कोमल प्रेरणा।