
कभी दरिया कभी तारों का मंज़र क़ैद करता हूँ
किसी क़े हुस्न का जादू नज़र भर क़ैद करता हूँ
मैं शाइ'र हूँ मुझे अल्लाह ने ऐसा हुनर बख्शा
मैं काग़ज़ की लकीरों में समुंदर क़ैद करता हूँ
— Altaf Iqbal
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